Edited By Subhash Kapoor,Updated: 01 Feb, 2026 10:02 PM

शहर के राजगुरु नगर इलाके में 129 एकड़ की स्कीम के तहत प्राइमरी स्कूल के लिए रिजर्व की गई जमीन को आवासीय प्रोजेक्ट में बदलने को लेकर विवाद गरमा गया है। लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (LIT) ने 1.05 एकड़ जमीन का क्लासिफिकेशन (CLU) बदलकर वहां रिहायशी प्लॉट...
लुधियाना: शहर के राजगुरु नगर इलाके में 129 एकड़ की स्कीम के तहत प्राइमरी स्कूल के लिए रिजर्व की गई जमीन को आवासीय प्रोजेक्ट में बदलने को लेकर विवाद गरमा गया है। लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (LIT) ने 1.05 एकड़ जमीन का क्लासिफिकेशन (CLU) बदलकर वहां रिहायशी प्लॉट या ग्रुप हाउसिंग बनाने की योजना बनाई है। लेकिन इस प्रस्ताव के खिलाफ कौंसिल ऑफ इंजीनियर्स ने मोर्चा खोल दिया है।
कौंसिल ने इस मामले में लिखित आपत्ति स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन के पास दर्ज करवाई है। कौंसिल का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा स्कूल के लिए रिजर्व की गई जमीन को रिहायशी प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल करना नियमों की स्पष्ट उल्लंघना है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।
कौंसिल ऑफ इंजीनियर्स के प्रधान कपिल देव ने कहा कि राजगुरु नगर स्कीम 1991-92 में शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि 33 साल बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट न तो इस जगह पर स्कूल बना पाया और न ही जमीन बेचने में सफल रहा। अब ट्रस्ट की मंशा केवल इस जमीन से बड़ा मुनाफा कमाने की प्रतीत होती है। कपिल देव ने कहा, “स्कूल के लिए रिजर्व की गई जमीन को रिहायशी प्लॉट या ग्रुप हाउसिंग में बदलना नियमों और न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। ऐसे कदम से न केवल नियामक ढांचे पर असर पड़ेगा बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर होगा।”