Edited By Urmila,Updated: 07 Sep, 2026 11:44 AM

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को प्रदेश का नया ए.आई.सी.सी. प्रभारी बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।
चंडीगढ़ (विनय): पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को प्रदेश का नया ए.आई.सी.सी. प्रभारी बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। सचिन पायलट ने भूपेश बघेल की जगह ली है, जिन्हें कांग्रेस हाईकमान ने असम की जिम्मेदारी सौंपी है।
कांग्रेस पार्टी में सचिन पायल युवा चेहरा होने के साथ-साथ संगठन के अनुभव और संतुलित कार्यशैली के माहिर माने जाते हैं। यही सचिन पायल की सबसे बड़ी ताकत भी मानी जाती है। पंजाब की मौजूदा गुटबाजी में उनका अपना कोई निजी खेमा नहीं है, इसी कारण कांग्रेस पार्टी को उनसे उम्मीद है कि वह वरिष्ठ नेताओं और सभी कार्यकर्त्ताओं को एक मंच पर लाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
संसद के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे से पूर्व पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म कर सभी को एक मंच पर एक साथ लाना भी सचिन पायलट की प्राथमिकता में शामिल रहेगा, जिसको लेकर उन्होंने पंजाब कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप से संपर्क बनाना शुरू कर दिया है।
‘पंजाब केसरी’ के साथ बातचीत में उन्होंने इस बात को कबूल करते हुए जल्द पंजाब आने की जानकारी दी। पंजाबी संस्कृति के प्रति अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए पायलट ने अहम राजनीतिक जिम्मेदारी देने पर हाईकमान का धन्यवाद करते हुए मौजूद चुनौतियों का सकारात्मक समाधान करने का विश्वास दिलाया।
पायलट के सामने बड़ी चुनौतियां
- कांग्रेस की अदंरूनी खींचतान को खत्म करना
- बूथ स्तर पर कांग्रेस और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना
- किसान, युवा, कर्मचारी, छोटे-बड़े कारोबारी और शहरी मतदाताओं के लिए स्पष्ट चुनावी एजैंडा बनाना
पंजाब में कांग्रेस के लिए आसान नहीं ‘चुनावी लड़ाई’
पार्टी की सीनियर लीडरशिप मौजूदा राजनीतिक हालात का आंकलन पहले ही कर चुकी है और वह खुद स्वीकार करते हैं कि बेशक अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में कांग्रेस के पास पंजाब में मजबूत राजनीतिक आधार है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी सत्ता में है, भाजपा लगातार पंजाब में अपना विस्तार करने में जुटी है और अकाली दल विभिन्न तरीकों से अपने खोए राजनीतिक आधार को वापस हासिल करने का प्रयास कर रहा है। बेशक कांग्रेस पंजाब में इस बार का चुनाव मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए बिना राहुल गांधी को मुख्य चेहरा बनाकर चुनाव लड़ेगी, लेकिन बड़े पदों की दौड़ में नेताओं की गुटबाजी कैसे खत्म होती ये पायलट के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
ए.आई.सी.सी. के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल का कहना है कि सचिन पायलट अपने अनुभव और संतुलित व्यवहार के दम पर पंजाब कांग्रेस को एक मंच पर लाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने केवल सत्ता विरोधी माहौल का लाभ उठाना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस को मजबूत स्थानीय नेतृत्व, प्रभावी चुनावी मुद्दों और कार्यकर्त्ताओं की सक्रिय भागीदारी के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पंजाब कांग्रेस को सचिन पायलट मौजूदा खींचतान के बादलों से निकालकर 2027 की सत्ता पर सुरक्षित लैडिंग करवा पाएंगे या नहीं।
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