Parents की बढ़ी चिंता, इन बच्चों को स्कूल में नहीं मिला दाखिला

Edited By Kalash,Updated: 05 Apr, 2025 06:37 PM

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दाखिला न होने के कारण अभिभावक परेशान हैं।

चंडीगढ़ (आशीष): नया शिक्षण सत्र शुरू होने जा रहा है लेकिन सैक्टर-38 स्थित विवेक हाई स्कूल में ई.ब्ल्यू.एस. और डी.जी. वर्ग के तहत दाखिला न मिलने से अभिभाववकों की चिंता बढ़ गई है। दाखिला न होने के कारण अभिभावक परेशान हैं। अभिभावक शिक्षा विभाग के निदेशक और जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी मिल चुके हैं लेकिन समस्या का हल नहीं निकला है। अभिभावकों का कहना है कि अगर विभाग और स्कूल के बीच किसी बात को लेकर मामला लटका है तो बच्चों के दाखिला संबंधी दूसरे स्कूल में सीट अलॉट करनी चाहिए थी ताकि उन्हें दाखिले के लिए भटकना न पड़ता। 

अभिभावको की मांग है कि शिक्षा विभाग स्कूल के साथ मामला का हल निकाल कर उनके बच्चों का दाखिला प्रदान करें अन्यथा नजदीक के अन्य प्राइवेट स्कूलों में दाखिल दिलवाने में सहयोग करे। शहर के प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश कक्षा में ई. डब्ल्यू.एस. और डी.जी. वर्ग के तहत 850 सीटों पर दाखिले के लिए 13 फरवरी को चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने सेंट्रलाइज्ड के माध्यम से ड्रॉ घोषित किया था। शिक्षा विभाग बेशक ई. डब्ल. यू. एरर और डी.जी. वर्ग के तहत सीटें अलॉट कर दी थी। 

अलॉट सीटों के लिए मोबाइल पर आया था संदेश 

शिक्षा विभाग की ओर से ई.डब्ल्यू.एस. और डी.जी. वर्ग के तहत दाखिल में अलॉट सीटों के लिए मोबाइल पर स्कूल का नाम से संदेश 13 फरवरी को प्राप्त हुए था, जिसमें तीन मार्च तक दाखिला करवाने का समय दिया गया था ताकि वे स्कूल में अपने दस्तावेज को जमा करवाकर अपनी सीट सुरक्षित कर सकें, लेकिन विवेक स्कूल अभिभावकों को स्कूल में जल्द बुलाने की बात कहकर वापस भेज देता है। अप्रैल माह शुरू हो चुका है। 

दस्तावेज की जांच करने को कहा है, जो सरासर गलत है: एच.एस. मामिक 

स्कूल के चैयरमैन एच.एस. मामिक का कहना है कि इस सेशन में इस वर्ग के किसी भी बच्चों का दाखिला न देने से मना नहीं किया गया। विभाग का पत्र मिला हैजिसमें स्कूल प्रबंधकों को अपने स्तर पर बच्चों की सूची के आधार पर दस्तावेज की जांच करने को कहा है, जो सरासर गलत है। विभाग को जांच करनी चाहिए। पत्र में लिखा है कि अगर इस वर्ग के बच्चे का दस्तावेज सही मिलता तो विभाग फीस की अदायगी नहीं करेगा। विभाग की शर्तें यह है कि जिस बच्चे को इस वर्ग के तहत दाखिला दिया जा रहा है वहइसी कैटेगरी का होना चाहिएए। अगर वह इस कैटेगरी का नहीं होगा तो विभाग की भोर से फीस का बकाया अदा नहीं किया जाएगा। स्कूल ई. डब्ल. यू.एस. और डी.जी. वर्ग के तहत 27 सीटों पर दाखिला देने से मना नहीं कर रहा है बल्कि वह दाखिला देने को तैयार है। 

दस्तावेज की जांच स्वयं करे शिक्षा विभाग 

स्कूलों में प्रीयाइमरी कक्षा में तीन से चार साल की आयु वर्ग में दाखिला हुए था। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि इस वर्ग के बच्चों के दस्तावेज की जांच स्वयं शिक्षा विभाग करे, न कि स्कूल प्रबंधक। तिन विभाग स्कूल प्रबंधकों को दस्तावेज की जांचकरने को कहा रहा है। जबकि दाखिला प्रक्रिया विभाग की देखरेख में होती है। सेंट्रलाइज्ड प्रक्रिया के तहत विभाग पोर्टल के माध्यम से बच्चों के दस्तावेज अपलोड करता है। दाखिले के लिए प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में हेल्प डेस्क के माध्यम से फार्म भरे जाते हैं। ड्रॉ विभागनिकलता है। स्कूल प्रबंधक सिर्फ विभाग की ओर से जारी सूची के आधार पर दाखिला देते हैं। 

दस्तावेजों की जांच नहीं करेंगे बल्कि विभाग जांच कर उनकी फीस भी अदा करें

आर.टी.ई. एक्ट के तहत बच्चा 8वीं कक्षा तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल से करता है तो उसकी फीस शिक्षा विभाग स्कूल को अदा करता है। वार्ड नंबर 25 के पार्षद योगेश ढींगरा का कहना है कि अभिभावकों के कहने पर स्कूल प्रबंधक से बातचीत की गई थी। स्कूल प्रबंधकों का कहना था कि विभाग की ओर से पुरानी फीस का बकाया नहीं मिला है, जिस कारण दाखिला नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मिलकर समस्या का हल करवा जाएगा ताकि बच्चों के भाविष्य से खिलवाड़ ना हो।

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