सावधान! सोशल मीडिया की खोखली चमक से दूर रहें नौजवान

Edited By Urmila,Updated: 18 Mar, 2023 04:28 PM

attention youth should stay away from the hollow glow of social media

आधुनिक जीवनशैली में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है।

फगवाड़ा (जलोटा): आधुनिक जीवनशैली में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसके अनेक फायदे हैं लेकिन इसके गंभीर परिणाम भी देखने को मिल रहे है। इसने हमारे बात करने, जानकारी सांझा करने और दुनिया भर के लोगों के साथ जुड़ने के तरीके में भले ही क्रांति ला दी है लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का अत्यधिक उपयोग माता-पिता, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच एक बढ़ती चिंता का विषय बन गया है लेकिन गंभीर पहलू यह है कि हमारा युवा वर्ग एक बहुत बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहा है और वे सोशल मीडिया एप्स पर अपने निजी अकाऊंट्स में ज्यादा से ज्याद अनुयायियों (फोलोवर्स) के लिए दीवानगी की हदें पार कर वह सब कुछ करने के लिए तैयार हैं। इसके बेहद गंभीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

कई मौको पर रिल्स व वीडियो शॉट लेते हुए खतरनाक स्टंट करने के दौरान अनेक युवाओं की मौत तक हुई है और यह सिलसिला निरंतर जारी है। अपने वीडियो बनाने की क्रेज इस हद तक हावी हो चुकी है कि इससे कई घर बर्बाद हो गए हैं और वैवाहिक संबंधों में खटास आई है। कई मौकों पर मामले युवा दम्पतियों में शादी बाद तलाक तक जा पहुंचे है और घरों में क्लेश तक पनपा है लेकिन सोशल मीडिया के प्रति आकर्षण जस का तस युवा पीढ़ी में बरकरार है।

नशे की लत बनी है सोशल मीडिया की कुछ एप्स

युवा लोग सोशल मीडिया पर अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, इसका पहला कारण यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नशे की लत के लिए डिजाइन किया गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्स एप और टिकटॉक आदि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम है जिनका युवा वर्ग निरंतर उपयोग करता हैं। यह एप्स उपयोगकर्त्ताओं को यथासंभव लंबे समय तक व्यस्त रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। वे डोपामाइन को ट्रिगर करने के लिए सूचनाओं, पसंद, टिप्पणियों और शेयरों का उपयोग करते हैं जो एक न्यूरोट्रांसमीटर की भांति खुशी और ईनाम की भावनाओं को पैदा करता है।

मस्तिष्क जितना अधिक डोपामाइन जारी करता है, उपयोगकर्त्ता प्लेटफॉर्म पर उतना ही अधिक आदी हो जाता है। इस लत से फीड के माध्यम से स्क्रॉल करने, पोस्ट पसंद करने और सामग्री पर टिप्पणी करने में घंटों खर्च हो सकते हैं, जो पुख्ता तौर पर समय की बर्बादी के अतिरिक्त कुछ नहीं है।

आए दिन कुछ न कुछ नया करने की मची है होड़

एक और कारण है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने प्रतस्पिर्धा और तुलना की संस्कृति बनाई है जहां युवा वर्ग लगातार नई सामग्री पोस्ट करने, अधिक अनुयायी प्राप्त करने और अधिक पसंद और टिप्पणियां प्राप्त करने का दबाव महसूस करते हैं। पसंद और स्वीकार किया जाने वाला यह दबाव भारी हो सकता है, जिससे चिंता, अवसाद और कम आत्मसम्मान हो सकता है। युवा लोगों को अपने साथियों के साथ रहने की आवश्यकता भी महसूस हो सकती है जिससे उन्हें अपने फोन की जांच करने और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से जुड़े रहने की निरंतर आवश्यकता होती है।

कार्य टालने का कारण बने हैं कई एप्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई युवा सोशल मीडिया का उपयोग उन कार्यों को टालने या टालने के तरीके के रूप में करते हैं जो उन्हें चुनौतीपूर्ण या उबाऊ लगते हैं। इससे खराब शैक्षणिक प्रदर्शन, समय सीमा चूक और उत्पादकता की कमी हो सकती है। सार्थक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए अपने समय और ऊर्जा का उपयोग करने के बजाय, युवा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अनगिनत घंटे बिता रहे हैं जो वास्तविक जीवन के लाभों के लिए बहुत कम प्रदान करते हैं।

जीवन में सब कुछ बन गया है सोशल मीडिया एप्स पर फॉलोअर्स का जुनून

सोशल मीडिया एप्स पर फॉलोअर्स हासिल करने का जुनून युवाओं के बीच एक और चिंताजनक प्रवृत्ति है। कई लोगों के लिए, अनुयायियों की संख्या वे लोकप्रियता और सफलता का पैमाना बन गए हैं। युवा लोग अधिक अनुयायियों को प्राप्त करने के लिए लगभग कुछ भी करने के लिए तैयार हैं जिसमें अनुचित सामग्री पोस्ट करना, खतरनाक चुनौतियों में भाग लेना और साइबर बुलिंग में संलग्न होना शामिल है।

मानसिक व शारीरिक स्तर पर बेहद गंभीर असर डालते हैं कई एप्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समय और ऊर्जा बर्बाद करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि अत्यधिक सोशल मीडिया के उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसमें चिंता, अवसाद और कम आत्मसम्मान में वृद्धि शामिल है। यह नींद की कमी, खराब शैक्षणिक प्रदर्शन और शारीरिक गतिविधि की कमी का कारण भी बन सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से अनुयायियों और सत्यापन को प्राप्त करने का दबाव सत्यापन की निरंतर आवश्यकता को जन्म दे सकता है, जिससे आत्म-मूल्य और आत्मवश्विास में कमी हो सकती है।

ऐसे में यह समय की मांग है कि माता-पिता, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग के संभावित परिणामों संबंधी युवा लोगों को शिक्षित करने के लिए वह सब करना चाहिए जो समय की मांग बना है।

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