दशहरे पर दिखेगा 221 फीट का रावण, 34 लाख रुपए की लागत से हो रहा तैयार

Edited By Vatika,Updated: 03 Oct, 2026 12:37 PM

a 221 foot tall ravana will be seen on dussehra

दशहरे के त्योहार को लेकर चंडीगढ़ में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशाल पुतले तैयार करने

चंडीगढ़: दशहरे के त्योहार को लेकर चंडीगढ़ में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशाल पुतले तैयार करने का काम जोर-शोर से चल रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 40 कारीगर पिछले 3 महीनों से दिन-रात पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बार सबसे बड़ा आकर्षण 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला रहेगा, जिसे पंचकूला में तैयार किया जा रहा है। इस पर करीब 34 लाख रुपए खर्च होने की जानकारी है। पुतले में करीब 2021 इको-फ्रेंडली पटाखे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 18 प्वाइंट लाइटें लगाई जाएंगी, जिन्हें रिमोट से कंट्रोल किया जाएगा। इस बार सिर्फ रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है, ताकि 221 फीट के विशाल पुतले के आसपास दर्शकों के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध हो सके।

70 क्विंटल स्टील और 720 बांस का इस्तेमाल
221 फीट ऊंचे रावण के पुतले को तैयार करने में करीब 70 क्विंटल यानी 7 टन स्टील पाइप और लोहे का इस्तेमाल किया जा रहा है। ढांचे को मजबूती देने के लिए करीब 720 बांस लगाए जा रहे हैं। इनमें हर बांस की लंबाई करीब 24 फीट है। रावण की पोशाक के लिए करीब 4,000 मीटर वेलवेट कपड़े का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं सेक्टर-46 में 100 फीट ऊंचे रावण के साथ 75-75 फीट के कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। कारीगर शाहरुख के परिवार में पिछले 4 पीढ़ियों से दशहरे के पुतले बनाने का काम किया जा रहा है। इस बार उनकी टीम सेक्टर-51, रामदरबार, सेक्टर-40, मोहाली और सेक्टर-49 समेत करीब 6 जगहों पर पुतले तैयार कर रही है। इन पुतलों की लागत करीब 1 लाख से सवा 2 लाख रुपए तक है।

360 डिग्री घूमेगा रावण का चेहरा
रावण के चेहरे को 360 डिग्री घुमाने के लिए मैकेनिकल सिस्टम लगाया जा रहा है। प्रत्येक पुतले में करीब 50 से 60 जोड़ लगाए जाएंगे, जिन्हें अलग-अलग रिमोट सिस्टम के जरिए संचालित किया जाएगा। कारीगर तेजिंदर के अनुसार, 221 फीट ऊंचे रावण को तैयार करने के लिए करीब 3 महीने से 40 कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। पुतले के लोहे के ढांचे से लेकर बांस, कपड़े, लाइटिंग और तकनीकी व्यवस्था तक हर चीज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कारीगर शाहरुख ने बताया कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं और यह काम उनके परिवार में कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले तैयार करने का काम करीब 45 दिनों से चल रहा है। उनकी टीम धनास, सेक्टर-49, रामदरबार समेत चंडीगढ़ और मोहाली की करीब 6 जगहों पर पुतले तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि बड़ी मात्रा में बांस असम से मंगवाया गया है। अलग-अलग जगहों पर तैयार किए जा रहे पुतलों के लिए करीब 200 क्विंटल बांस इस्तेमाल किया जा रहा है।

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