1100 राखियां जवानों को समर्पित, आसफवाला शहीदी स्मारक में गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 23 Aug, 2026 05:06 PM

1 100 rakhis dedicated to soldiers

सीमा पर देश की रक्षा में तैनात जवानों के सम्मान में फाजिल्का की वुमन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से तैयार की गई 1100 विशेष राखियां रविवार को ‘राखी सरहद के नाम—राष्ट्र रक्षा का सम्मान, बहनों का अभिमान’ कार्यक्रम में जवानों को समर्पित की गईं।

फाजिल्का : सीमा पर देश की रक्षा में तैनात जवानों के सम्मान में फाजिल्का की वुमन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से तैयार की गई 1100 विशेष राखियां रविवार को ‘राखी सरहद के नाम—राष्ट्र रक्षा का सम्मान, बहनों का अभिमान’ कार्यक्रम में जवानों को समर्पित की गईं। आसफवाला शहीदी स्मारक में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में देशभक्ति और भावनाओं का संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सोसाइटी की महिला सदस्यों द्वारा तैयार की गई राखियों की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति समाज का सम्मान और कृतज्ञता हमेशा बनी रहनी चाहिए। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

माइनस तापमान से तपती धूप तक जवान देते हैं पहरा : करण गिल्होत्रा

समाजसेवी करण गिल्होत्रा ने कहा कि 1100 राखियां उन जवानों के सम्मान और उनके प्रति बहनों के स्नेह का प्रतीक हैं, जो कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं पर डटे रहते हैं। उन्होंने कहा, “माइनस तापमान से लेकर तपती धूप तक जवान सीमा पर सीना ताने खड़े रहते हैं। उनकी वजह से ही देशवासी अपने घरों में सुरक्षित हैं।”

उन्होंने कहा कि राखियों के जरिए जवानों तक यह संदेश पहुंचाया गया है कि देश की बहनें उनके त्याग और सेवा को नमन करती हैं। जवान अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं और उनके त्याग को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

शहीदी स्मारक में भावुक हुआ माहौल

आसफवाला शहीदी स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिला सदस्यों ने जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और देश की रक्षा में शहीद हुए वीरों को श्रद्धांजलि दी। राखियां समर्पित करते समय माहौल भावुक हो गया।

करण गिल्होत्रा ने कहा कि ‘राखी सरहद के नाम’ कार्यक्रम का उद्देश्य देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक बहनों का प्यार और सम्मान पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि 1100 राखियां तैयार कर उन्हें जवानों को समर्पित करना केवल एक सामाजिक पहल नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भाव है।

उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के लिए केजीएफ टीम और आसफवाला शहीदी स्मारक कमेटी और सिविल प्रशासन का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आसफवाला शहीदी स्मारक जैसे पवित्र स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करना गर्व का विषय है। इस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को भी सैनिकों के बलिदान और देश के प्रति उनके समर्पण से जोड़ने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि देश की रक्षा करने वाले हर जवान के साथ समाज मजबूती से खड़ा है। महिला सदस्यों ने कहा कि उनके लिए यह पहल केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की रक्षा करने वाले जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और बहनों के प्यार को व्यक्त करने का माध्यम है।

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