मुश्किल में अभिभावक! कौन समझाए नादानों को ?

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Wednesday, November 29, 2017-11:18 AM

जालन्धर(सुनील): वर्तमान में अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाने के साथ-साथ उन्हें हर सुख-सुविधा मुहैया करवाना हर मां-बाप की इच्छा होती है। इस मोह में अभिभावक अपने अवयस्क बच्चों को स्कूल/कालेज आने-जाने के लिए वाहन तक दे देते हैं। उन्हें तो सड़क पर नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने के तरीके का भी पता नहीं होता। बच्चों की जिद्द के सामने मां-बाप को झुकना ही पड़ता है मगर आखिर में भुगतना भी उन्हीं को पड़ता है। तब अभिभावकों के दिन का चैन व रात की नींद छिन जाती है। आमतौर पर नाबालिग बच्चे एक्टिवा, मोटरसाइकिल, बुलेट मोटरसाइकिल या फिर अन्य भारी वाहन लेकर स्कूल पहुंचे दिख जाते हैं।  बच्चों के इस कदम पर अपनी निगाह रखना अभिभावकों की जिम्मेवारी बनती है। उन्हें बालिग होने पर ही लाइसैंस दिलवाकर वाहन चलाने की अनुमति देनी चाहिए ताकि दिन-ब-दिन बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।बच्चे अक्सर ट्रिपल राडिंग करते हैं। पकड़े जाने पर वे पुलिस के सामने फिर ऐसा नहीं करने के वायदे करते हैं, मगर उनकी आदत नहीं सुधरती। इसमें दोष किसका है? अभिभावक या फिर ट्रैफिक पुलिस का जो ऐसे बच्चों को वाहन चलाने देते हैं।


अभिभावकों का रोल
इस सिलसिले में जब गुरदीप सिंह से बात की गई तो उन्होंने इस पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि वह अपने  नाबालिग बच्चों  को कभी भी वाहन चलाने की अनुमति नहीं देंगे। वह नाबालिग ब"ाों को वाहन चलाने देने के बिल्कुल खिलाफ हैं, क्योंकि मां-बाप के लिए अपने बच्चों  की जान सबसे प्यारी होती है।

क्या कहना है ए.सी.पी. ट्रैफिक  का
इस संबंध में जब ट्रैफिक के ए.सी.पी. हरबिन्द्र सिंह भल्ला से बात की गई तो उनका कहना तथा कि वे सभी पेरैंट्स को अंडरएज बच्चों को दोपहिया वाहन आदि न देने की अपील करते हैं। उनका सुझाव है कि नाबालिग ब"ाों को स्कूल की ट्रांसपोर्टेशन के जरिए ही स्कूल भेजा जाए। ट्रैफिक पुलिस ने कई बार वाहन चला रहे नाबालिग ब"ाों के चालान काटे हैं तथा आगे भी बनती कार्रवाई की जाएगी।

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