Edited By Vatika,Updated: 14 Apr, 2026 11:41 AM

लुधियाना के सलेम टाबरी स्थित पीरू बंदा श्मशान घाट में मंगलवार को दर्द, शोक और सन्नाटे का ऐसा
लुधियाना (गणेश / सचिन): लुधियाना के सलेम टाबरी स्थित पीरू बंदा श्मशान घाट में मंगलवार को दर्द, शोक और सन्नाटे का ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यमुना नदी में हुए दर्दनाक हादसे का शिकार बने यश भल्ला को जब अंतिम विदाई दी गई, तो पूरे वातावरण में गहरा मातम छा गया। जैसे ही यश की पार्थिव देह श्मशान घाट पहुंची, वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ गम में डूब गई।
3 दिन बाद बरामद हुआ शव
परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और शहर के लोग नम आंखों से उसे अंतिम विदाई देने पहुंचे। हर चेहरा उदास और हर आंख नम दिखाई दे रही थी। इस दौरान यश भल्ला के माता-पिता ने बेहद भावुक होकर बताया कि यश पहली बार ही वृंदावन गया था। उन्हें क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी की पहली और आखिरी यात्रा बन जाएगी। परिजनों के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले यमुना नदी में हुए हादसे के दौरान यश लापता हो गया था। घटना के बाद से ही परिवार और प्रशासन उसकी तलाश में जुटे हुए थे। हर पल एक उम्मीद थी कि यश सकुशल वापस लौट आएगा, लेकिन तीन दिन बाद जब उसका शव नदी से बरामद हुआ, तो यह खबर पूरे परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

श्मशान घाट में उमड़ा जनसैलाब
यश की मां बार-बार अपने बेटे को पुकार रही थीं, पिता बेसुध नजर आए और भाई का रो-रोकर बुरा हाल था। यह दर्दनाक दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम करने के लिए काफी था। यश भल्ला को जानने वाले लोगों ने बताया कि वह बेहद मिलनसार, धार्मिक और खुशमिजाज स्वभाव का युवक था। वह अक्सर “राधे-राधे” का नाम जपता रहता था और अपने व्यवहार से हर किसी का दिल जीत लेता था। उसके अचानक यूं चले जाने से हर कोई स्तब्ध है। श्मशान घाट में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि यश ने अपने जीवन में कितने लोगों के दिलों में जगह बनाई थी। शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग इस दुखद घड़ी में परिवार के साथ खड़े नजर आए। हर कोई बस यही कह रहा था कि इतना हंसमुख और नेक दिल युवक इस तरह सबको छोड़कर चला जाएगा, इसका किसी को अंदाजा नहीं था।
गहरे शोक में डूबे लोग
यमुना हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का चिराग बुझाया है, बल्कि पूरे समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्थाओं और सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज लुधियाना के गली-मोहल्लों में सिर्फ एक ही चर्चा है यश भल्ला की असमय मौत। लोग गहरे शोक में डूबे हुए हैं और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे। यश भल्ला की अंतिम विदाई सिर्फ एक रस्म नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसा भावनात्मक पल बन गया, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। पहली बार वृंदावन जाने वाले इस युवक की यात्रा हमेशा के लिए थम गई, लेकिन पीछे छोड़ गई यादें, आंसू और एक गहरा खालीपन।