PGI के इतिहास में पहली बार अनोखी सर्जरी, छोटे हार्ट पम्प से बचाई 90 साल के शख्स की जान

Edited By Vatika,Updated: 01 Jul, 2022 01:35 PM

unique surgery for the first time in the history of pgi

पी.जी.आई. कार्डियक सैंटर में एक रेयर सर्जरी की गई।

चंडीगढ़ (पाल): पी.जी.आई. कार्डियक सैंटर में एक रेयर सर्जरी की गई। इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती मरीज की उम्र थी। एडवांस कार्डियक सैंटर (ए.सी.सी.) में 90 वर्षीय की एंजियोप्लास्टी की गई है। पी.जी.आई. के इतिहास में यह इस तरह की पहली सर्जरी है। कार्डियक सैंटर के हैड डा. यश पाल शर्मा और एसोसिएट प्रो. डा. हिमांशु गुप्ता की देखरेख में यह सर्जरी हुई है। डॉ गुप्ता ने बताया कि मरीज का दिल काफी कमजोर था और कोरोनरी आर्टरी से संबंधित बीमारी थी। आमतौर पर ऐसी हालात में ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, लेकिन उम्र के साथ मुश्किलें बढ़ जाती है। मरीज का हार्ट कमजोर था जिस कारण ओपन हार्ट सर्जरी नहीं की जा सकती थी। उसकी जान को भी नुकसान पहुंच सकता था। इस तरह के मामलों में एंजीयोप्लास्टी करना भी आसान नहीं होता। मरीज को केल्किफाइड लेफ्ट मेन ट्रिफरकेशन बीमारी थी और उसका दिल पहले से ही कमजोर था।

मरीज को इंपेला डिवाइस लगाया गया
मरीज की हालत को देखते हुए इंपेला डिवाइस लगाया गया है। यह एक छोटा हार्ट पम्प होता है, जो एंजीयोप्लास्टी प्रक्रिया के दौरान मरीज को सहायता पहुंचाता है। मरीज को हैविली केल्सिफाइड कोरोनरीज था। ऐसे में तीन प्रकार के रोटाब्लेटर बरस इस्तेमाल किए गए। इसमें शॉक वेव बेलून इस्तेमाल किए गए ताकि स्टैंट डालते वक्त सही मात्रा में कैल्शियम निकाला जा सके। यह प्रोसेस बहुत मुश्किल होता है और इसमें 4 घंटे का समय लगा। इंपेला डिवाइस ने मरीज को पूरी प्रक्रिया के तहत स्थिर रखा। मरीज की हालात बेहतर है और रिकवरी हो रही है। 2 दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। इस तरह की प्रक्रियाओं को इंपेला जैसे नए डिवाइस के बिना भी किया गया है। यह मरीज के लिए काफी हाई रिस्क होता था। पी.जी.आई. ने कहा कि अब इस नए डिवाइस के जरिए हाई रिस्क मरीजों का इलाज किया जा सकेगा।

एंजियोप्लास्टी में हृदय की रक्त वाहिकाओं को खोला जाता है
एंजियोप्लास्टी एक ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक ब्लड सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाओं को खोला जाता है। मैडीकल भाषा में इन रक्त वाहिकाओं को कोरोनरी आर्टरीज कहते हैं। डाक्टर अक्सर दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी समस्याओं के बाद एंजियोप्लास्टी का सहारा लेते हैं।

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