प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों पर निगम कमिश्नर सख्त, रोजाना बनेगी Recovery Report

Edited By Urmila,Updated: 12 Jan, 2026 12:04 PM

strict action will be taken against property tax defaulters

नगर निगम अमृतसर ने प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी को लेकर कमर कस ली है। लंबे समय से टैक्स नहीं भरने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए।

अमृतसर (रमन ): नगर निगम अमृतसर ने प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी को लेकर कमर कस ली है। लंबे समय से टैक्स नहीं भरने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए नगर निगम कमिश्नर विक्रमजीत सिंह शेरगिल ने अधिकारियों को बैठक के दौरान सख्त हिदायतें जारी की हैं कि वित्तीय वर्ष में हर जोन का टारगेट पूरा होना चाहिए। रिकवरी को लेकर किसी तरीके की ढील नहीं बख्शी जाएगी। ‘जनवरी, फरवरी और मार्च’ तक विभाग की सभी टीमें रोजाना फील्ड में उतरेंगी और प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी को लेकर सख्त अभियान चलाएगीं ।

कमिश्नर ने हिदायतें दी है कि हर जोन में सर्वे किया जाएगा। जिन संपत्ति मालिकों ने वर्षों से टैक्स जमा नहीं कराया है, उनकी डिफॉल्टर लिस्ट तैयार कर तुरंत नोटिस जारी किए जाएंगे। खास बात यह है कि अब रिकवरी अभियान की रोजाना रिपोर्ट तैयार होगी,जोकि कमिश्नर को जाएगी। इस बार अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े बकायेदारों के साथ-साथ छोटे टैक्स डिफॉल्टर भी निगम की रडार पर होंगे। जरूरत पड़ने पर जुर्माना, बकाया टैक्स की वसूली, संपत्ति सील करने और कानूनी कार्रवाई तक की तैयारी है। वहीं, रिकवरी में ढिलाई बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि प्रॉपर्टी टैक्स की मजबूत वसूली से शहर के विकास कार्यों को रफ्तार मिलेगी। सड़कें, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए टैक्स रिकवरी बेहद जरूरी है।

प्रॉपर्टी टैक्स में बड़ा खेल!

सैल्फ टैक्स के नाम पर धूल झोंक रहे शहरवासी, करोड़ों का राजस्व डकार रहे बड़े कॉमर्शियल प्रतिष्ठान। नगर निगम अमृतसर की प्रॉपर्टी टैक्स वसूली व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर में बड़ी संख्या में संपत्ति मालिक सैल्फ असेसमैंट के नाम पर विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। वास्तविक प्रॉपर्टी टैक्स पूरा नहीं भरा जा रहा, जिससे नगर निगम को हर साल भारी राजस्व नुक्सान उठाना पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार कई बड़े कॉमर्शियल प्रतिष्ठान, शोरूम, होटल, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल और व्यावसायिक इमारतें खुद को कम क्षेत्रफल या आंशिक उपयोग दिखाकर नाममात्र टैक्स जमा कर रही हैं। अगर आज किसी थर्ड पार्टी सर्वे से निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो शहर के कई बड़े नामी-गिरामी कॉमर्शियल ठिकाने सीधे तौर पर फंस सकते हैं।

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