रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे पंजाब के युवक की घर वापसी, एक बिस्कुट... खौफनाक मंजर की सुनाई दास्तां

Edited By Urmila,Updated: 07 Oct, 2026 11:10 AM

return of a punjab youth stranded in the russia ukraine war

रूस-यूक्रेन के भयानक युद्ध के मैदान में 9 महीने तक मौत के साए में रहने वाले पटियाला के नौजवान गगनदीप सिंह की आखिरकार घर वापसी हो गई है।

सुल्तानपुर लोधी (धीर): रूस-यूक्रेन के भयानक युद्ध के मैदान में 9 महीने तक मौत के साए में रहने वाले पटियाला के नौजवान गगनदीप सिंह की आखिरकार घर वापसी हो गई है। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा किए गए लगातार प्रयासों के चलते गगनदीप 26 अगस्त 2026 को सुरक्षित भारत लौट आया। घर पहुंचने के बाद गगनदीप सिंह निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचा और संत सीचेवाल का भावुक होकर धन्यवाद किया।

निर्मल कुटिया में गगनदीप ने युद्ध के दौरान झेले दिल दहला देने वाले पलों को साझा करते हुए बताया कि वह मई 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। सितंबर 2025 में एक साथी ने उसे 2 लाख रुपये मासिक वेतन का लालच देकर कथित तौर पर रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। थोड़ी-सी ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे रूस-यूक्रेन युद्ध के मैदान में भेज दिया गया। इसके बाद परिवार से उसका संपर्क भी पूरी तरह टूट गया।

गगनदीप के परिवार ने 20 जनवरी 2026 को संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय को तीन बार पत्र लिखे और एक बार विदेश मंत्री से मुलाकात करके भी मामला उठाया। संसद में भी रूसी सेना में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी का मुद्दा उठाया गया। इन प्रयासों के बाद गगनदीप की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।

‘कोई दिन ऐसा नहीं था, जिस दिन मौत न देखी हो’

गगनदीप ने बताया कि युद्ध के दौरान वह यूक्रेन के अंदर राजधानी कीव तक पहुंच गया था। वहां माइन्स की चपेट में आने से वह घायल भी हो गया, जिसके बाद उसे पीछे भेज दिया गया। युद्ध के भयावह हालात को याद करते हुए उसने कहा वहां कोई दिन ऐसा नहीं था, जिस दिन मौत न देखी हो।” उसने बताया कि चारों तरफ गोलाबारी और मौत का मंजर होता था।

कई बार हालात इतने खराब हो जाते थे कि पूरा दिन सिर्फ एक बिस्कुट या एक टॉफी खाकर गुजारना पड़ता था। वापस लौटने का कोई रास्ता नजर नहीं आता था और जिंदा घर लौटने की उम्मीद भी टूट चुकी थी। गगनदीप ने कहा कि भारत लौटने के बाद भी युद्ध का डर उसका पीछा नहीं छोड़ रहा। कई दिनों तक वह ठीक से सो नहीं सका। उसने भावुक होते हुए कहा कि यदि संत बलबीर सिंह सीचेवाल उसकी वापसी के लिए प्रयास न करते तो शायद वह जिंदा अपने परिवार के पास वापस नहीं आ पाता।

विदेश जाने वाले नौजवानों को गुमराह करने वाले लालच से सावधान रहने की अपील

इस मौके संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय नौजवानों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग से गगनदीप को सुरक्षित भारत लाने में मदद मिली।

उन्होंने पंजाबी नौजवानों से अपील की कि विदेशों में नौकरियों के नाम पर किए जाने वाले गुमराह करने वाले प्रचार और खतरनाक लालच से सावधान रहें। माता-पिता को भी अपने बच्चों के विदेश जाने से पहले वीजा, नौकरी और अन्य सभी दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए।

दो बहनों के इकलौते भाई की वापसी ने परिवार को दी नई जिंदगी

गगनदीप की बहन ने भावुक होते हुए बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद गगनदीप ही दो बहनों का इकलौता भाई है। उसकी वापसी से परिवार को जैसे नई जिंदगी मिल गई है। उसने कहा कि जब भी सोशल मीडिया पर रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों के साथ हुई घटनाओं की खबरें सुनते थे तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक जाती थी। उसने कहा कि संत सीचेवाल ने उनका हाथ थामा और गगनदीप को सुरक्षित घर लाने के लिए लगातार प्रयास किए। परिवार ने संत सीचेवाल का दिल से धन्यवाद किया।

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