Edited By Kamini,Updated: 04 Apr, 2025 01:46 PM

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा 5 अप्रैल को सुल्तानपुर लोधी की पवित्र भूमि पर रैली करने जा रहे हैं।
सुल्तानपुर लोधी : पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा 5 अप्रैल को सुल्तानपुर लोधी की पवित्र भूमि पर रैली करने जा रहे हैं। लोग इस कदम को पार्टी के वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह से उनकी 'दुश्मनी' की नई कड़ी के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने इस मुद्दे को कम करने की कोशिश की और रैली को पार्टी की 'जुड़ेगा ब्लाक, जीतेगी कांग्रेस' अभियान का हिस्सा बताया। दूसरी ओर राणा गुरजीत ने कांग्रेस पार्टी की रैली के साथ ही अपने बेटे आजाद विधायक राणा इंद्रप्रताप सिंह की निजी रैली रखी है, जिसका नाम 'नई सोच-नवां पंजाब' रखा गया है।
स्थानीय लोगों ने कांग्रेस हाईकमान से सवाल किया कि राणा गुरजीत सिंह उसी पार्टी के खिलाफ जाकर 2027 के चुनाव में पार्टी को सत्ता हासिल करने से रोकने के लिए नया खेल खेल रहे हैं जिसने राणा गुरजीत सिंह को इस मुकाम पर पहुंचाया है। पूर्व मंत्री के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह वर्तमान में क्षेत्र से आजाद विधायक हैं। राणा गुरजीत पड़ोसी सीट कपूरथला से कांग्रेस विधायक हैं। सुल्तानपुर लोधी रैली राणा गुरजीत द्वारा 11 मार्च को वडिंग के पैतृक जिले मुक्तसर में एक रैली करने के कुछ सप्ताह बाद आयोजित की जा रही है।
ज्ञात हो कि लुधियाना से लोकसभा सदस्य बनने से पहले वडिंग मुक्तसर के गिद्दड़बाहा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक थे, यह सीट उनकी पत्नी अमृता वडिंग पिछले साल उपचुनाव में हार गईं थीं। इससे पहले राणा गुरजीत ने राज्य पार्टी प्रमुख पर निशाना साधा था, उनको 'स्वार्थी नेता' बताया था और पंजाब में पार्टी का नेतृत्व करने की इच्छा जताई थी। इस गुस्से के बाद वडिंग ने 'अनुशासनहीनता' अपनाने वालों पर कार्रवाई भी की। अब देखने वाली बात यह होगी कि 'नई सोच-नया पंजाब' रैली के बाद कांग्रेस हाईकमान राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है? राणा गुरजीत किस पक्ष में जाते हैं, पार्टी पक्ष में या उनके बेटे विधायक राणा इंद्र प्रताप द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम में? आपको यह भी बता दें कि पार्टी में मतभेद सुलझाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पंजाब प्रभारी बप्रभारी भूपेश बघेल को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
उन्होंने पार्टी नेताओं से अपने मतभेदों को सार्वजनिक नहीं करने को कहा, जिससे राज्य कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया। वहीं, आगामी रैली के बारे में टिप्पणी करते हुए वडिंग ने कहा कि हमारे ब्लॉक अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि, राणा गुरजीत ने कहा कि राज्य भर में रैलियां करना उनका कर्त्तव्य है, उन्हें ऐसा करने दीजिए। आदर्श रूप से उन्हें ऐसा पहले ही करना चाहिए था लेकिन अब ऐसा लगता है कि प्रतिस्पर्धा के कारण वे ऐसा कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह रैली में शामिल होंगे तो उन्होंने कहा कि देखते हैं। इस बीच 2022 में राणा गुरजीत के बेटे से विधानसभा चुनाव हारने वाले पूर्व विधायक नवतेज सिंह चीमा ने कहा कि भुलत्थ विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के रैली में शामिल होने की संभावना है। बता दें कि खैहरा भी राणा गुरजीत के आलोचक रहे हैं।
कांग्रेस के पंजाब इंचार्ज द्वारा पार्टी में मतभेद खत्म करने की चेतावनी बेअसर
बताया जा रहा है कि पिछले दिनों ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उन्होंने पार्टी नेताओं से अपने मतभेदों को सार्वजनिक नहीं करने को कहा था, जिससे राज्य कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर विराम लग गया। इसके बावजूद पार्टी के नेता एक-दूसरे के सामने आ रहे हैं। अब हम यहां कह सकते हैं कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल द्वारा पार्टी में मतभेद खत्म करने के लिए नेताओं को दी गई चेतावनी भी बेअसर रही है।
कहीं राणा गुरजीत की भाजपा में जाने की तैयारी तो नहीं
राणा गुरजीत सिंह की कांग्रेस हाईकमान की रैली को खुली चुनौती कहीं इस बात की ओर इशारा तो नहीं कि 2027 के आगामी चुनाव में भाजपा में उनकी एंट्री होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक राणा गुरजीत सिंह पार्टी के नियमों के खिलाफ जाकर सीधे तौर पर हाईकमान को चुनौती दे रहे हैं, इससे साफ है कि इसमें भाजपा का हाथ हो सकता है।
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