पंजाब के मुख्य सचिव को अदालत से फटकार, क्या हो सकती है जेल?

Edited By Pardeep,Updated: 23 Feb, 2026 11:23 PM

punjab chief secretary reprimanded by court could he be jailed

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लगभग 15 वर्षों से लंबित स्टाम्प ड्यूटी से जुड़े एक विवाद में पंजाब सरकार के अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है और यह भी पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना...

जालंधरः पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लगभग 15 वर्षों से लंबित स्टाम्प ड्यूटी से जुड़े एक विवाद में मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है और यह भी पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने पाया कि बार-बार निर्देशों और प्रशिक्षण संबंधी आश्वासनों के बावजूद अधिकारियों द्वारा गैर-कारणयुक्त (नॉन-स्पीकिंग) और संक्षिप्त आदेश पारित किए जा रहे हैं, जिससे अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ रही है।  

यह मामला हरप्रताप सिंह बनाम राज्य पंजाब एवं अन्य से संबंधित है, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी की अदालत में हुई। अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि विवाद वर्ष 2010 से लंबित है।

15 साल से लंबित मामला, फिर भी स्पष्ट निर्णय नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि पहले दौर की सुनवाई में आयुक्त द्वारा मामले को स्पॉट निरीक्षण के अभाव में वापस कलेक्टर को भेजा गया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी पूर्व आदेशों को रद्द करते हुए कलेक्टर को मामले का पुनः निर्णय करने को कहा था, लेकिन कलेक्टर ने वही गलती दोबारा दोहराई। इसके बाद जब अपील दायर की गई तो अपीलीय प्राधिकरण ने पूरे 15 वर्ष के इतिहास को नोट करने के बावजूद बिना किसी ठोस चर्चा के अपील खारिज कर दी।

कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 के आयुक्त, जालंधर डिवीजन द्वारा पारित आदेश का अवलोकन करते हुए कहा कि यह आदेश प्रथम दृष्टया अत्यंत संक्षिप्त और बिना कारण दर्ज किए पारित किया गया प्रतीत होता है, जो न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।  

प्रशिक्षण को लेकर पहले भी दिए गए थे निर्देश

कोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में एक अन्य मामले (CWP-6947-2023) में भी अधिकारियों के प्रशिक्षण की कमी पर गंभीर चिंता जताई गई थी और मुख्य सचिव ने हलफनामा देकर आश्वासन दिया था कि सभी विभागों के अधिकारियों को महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MGSIPA), चंडीगढ़ में प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि अनावश्यक मुकदमेबाजी कम हो सके।  

मुख्य सचिव द्वारा 19 फरवरी 2026 को दाखिल हलफनामे में बताया गया कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। हालांकि कोर्ट ने पाया कि जिस आयुक्त ने विवादित आदेश पारित किया, उसे 2015 और 2021 में प्रशिक्षण दिया गया था और 2023 के बाद कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया।  

राज्य के कारण बढ़ रही अनावश्यक मुकदमेबाजी

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य की कार्यप्रणाली के कारण व्यापक और टाली जा सकने वाली मुकदमेबाजी उत्पन्न हो रही है, जो विधि के उस सिद्धांत के विपरीत है जिसमें कहा गया है कि मुकदमों का शीघ्र अंत होना राज्य के हित में है।  अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि मुख्य सचिव द्वारा पूर्व में दिए गए आश्वासन के अनुरूप अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया होता तो संभवतः ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।  

मुख्य सचिव से मांगा स्पष्टीकरण, अवमानना की चेतावनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को एक और अवसर देते हुए यह निर्देश दिया है कि वे स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ कार्रवाई, जिसमें अवमानना कार्यवाही भी शामिल है, क्यों न की जाए। साथ ही उन्हें इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।  

अगली सुनवाई 13 मार्च को

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च 2026 निर्धारित की है। इस बीच अदालत की इस सख्त टिप्पणी ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे, विशेषकर राजस्व और अर्द्ध-न्यायिक अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशिक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में स्टाम्प ड्यूटी और प्रशासनिक आदेशों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बिना कारण और विधिक विश्लेषण के पारित आदेशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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