शिक्षा विभाग की अधूरी तैयारी ने निजी स्कूलों को किया बेहाल, पोर्टल पर सर्वर एरर और गायब डाटा ने उड़ाई नींद

Edited By Vatika,Updated: 13 Jan, 2026 10:45 AM

private school

निजी स्कूलों के लिए आर.टी.ई. एक्ट के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का सरकारी फरमान

लुधियाना (विक्की): निजी स्कूलों के लिए आर.टी.ई. एक्ट के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का सरकारी फरमान परेशानी का सबब बन गया है। एक तरफ जहां डिप्टी कमिश्नर (डी.सी.) हिमांशु जैन ने 12 जनवरी तक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य की है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की तकनीकी खामियों और अधूरी तैयारी ने स्कूलों के पसीने छुड़ा दिए हैं। सोमवार को जब स्कूलों ने विभाग के पोर्टल पर लॉग इन करने की कोशिश की तो तकनीकी गड़बड़ियों के कारण अधिकांश स्कूल रजिस्ट्रेशन करने में नाकाम रहे।

पोर्टल का बुरा हाल, पासवर्ड हैड ऑफिस के पास
निजी
 स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि विभाग के पास कई स्कूलों का यूडाइस डाटा ही उपलब्ध नहीं है। विडंबना यह है कि कई स्कूलों के पास लॉग इन आई.डी. (यूडाइस कोड) तो है लेकिन पासवर्ड गायब है। जब स्कूलों ने इस संबंध में विभाग से संपर्क किया तो स्थानीय अधिकारियों ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि पासवर्ड केवल हैड ऑफिस से ही मिलेगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि पोर्टल ही तैयार नहीं था, तो स्कूलों पर सख्त समय-सीमा का दबाव क्यों बनाया जा रहा है? लॉग इन के समय लगातार 'सर्वर एरर' आने से स्कूल संचालक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

डी.सी. के सख्त आदेश लेकिन विभाग की सुस्त चाल
उल्लेखनीय
 है कि डी.सी. हिमांशु जैन ने लुधियाना के सभी प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर) को आर.टी.ई. एक्ट के तहत कमजोर और पिछड़े वर्गों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर.टी.ई. पोर्टल पर स्कूलों को अपनी एंट्री-लैवल सीटें, ट्यूशन फीस और मान्यता (सी.ओ.आर.) नंबर अपलोड करना अनिवार्य है। प्रशासन ने दाखिला प्रक्रिया और फीस वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है लेकिन विभाग द्वारा प्रदान किया गया तकनीकी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।

नियमों का हवाला और दंडात्मक कार्रवाई का डर
प्रशासनिक
 आदेशों के अनुसार, इन आरक्षित सीटों पर केवल परिवहन शुल्क लेने की अनुमति है और किसी भी तरह के टैस्ट या इंटरव्यू पर पाबंदी है। नियमों की अनदेखी पर मान्यता रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है लेकिन स्कूल संचालकों का तर्क है कि जब विभाग का अपना पोर्टल ही सही ढंग से काम नहीं कर रहा, तो वे समय-सीमा के भीतर जानकारी कैसे अपलोड करें? निजी स्कूलों ने विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताया है और मांग की है कि रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाने के साथ तकनीकी समस्याओं को तुरंत हल किया जाए।

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