Edited By Vatika,Updated: 18 Jul, 2026 02:46 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जालंधर दौरे को केवल विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि
जालंधर (अनिल पाहवा): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जालंधर दौरे को केवल विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति के अहम संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सिख, हिंदू और दलित समाज से जुड़े कई प्रतीकात्मक संदेश दिए, जिससे साफ संकेत मिला कि भाजपा राज्य के सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है।
प्नधानमंत्री डेरा सचखंड बल्लां में मत्था टेक चुके हैं मत्था
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महाराजा रणजीत सिंह और सरदार तेजा सिंह समुद्री का उल्लेख कर सिख समाज को सम्मान देने का संदेश दिया। वहीं, जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन से काशी के लिए संत रविदास एक्सप्रेस को रवाना कर दलित समाज तक भी विशेष संदेश पहुंचाने का प्रयास किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से मुलाकात भी की। इससे पहले भी प्रधानमंत्री डेरा सचखंड बल्लां में मत्था टेक चुके हैं और संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान दिए जाने को भी भाजपा दलित समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
दलित आबादी का प्रतिशत पंजाब में सबसे अधिक
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की नजर खास तौर पर दोआबा क्षेत्र पर है, जिसे पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपना 'लॉन्चिंग पैड' बनाने की तैयारी में है। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जैसे जिलों वाले इस क्षेत्र में दलित आबादी का प्रतिशत पंजाब में सबसे अधिक माना जाता है। कई विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह इलाका भाजपा की चुनावी रणनीति का केंद्र बनता नजर आ रहा है।प्रधानमंत्री के इस दौरे में विकास परियोजनाओं के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक संदेशों का संतुलन भी साफ दिखाई दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस कार्यक्रम के जरिए 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पंजाब के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास किया है।