Edited By Sunita sarangal,Updated: 08 Jun, 2026 05:39 PM
जून का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच गया है।
बरनाला(विवेक सिंधवानी, रवि): जून का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच गया है। पंजाब के बरनाला जिले में भी पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। इस चिलचिलाती धूप और असहनीय उमस से राहत पाने के लिए बरनाला और इसके आस-पास के क्षेत्रों से लोगों का पहाड़ों की ओर पलायन अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है।जहां एक तरफ हिमाचल प्रदेश की बर्फीली और ठंडी वादियां पर्यटकों से गुलजार हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बरनाला के मुख्य बाजारों, रिहायशी इलाकों और सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। इस बदलते ट्रेंड ने न केवल स्थानीय जीवनशैली को प्रभावित किया है, बल्कि बरनाला के स्थानीय व्यापारिक चक्र को भी एक नया मोड़ दे दिया है।
पर्यटन का नया हब बने हिमाचल के हिल स्टेशन: बरनाला से बढ़ी बुकिंग
बरनाला के स्थानीय ट्रैवल एजेंटों और टूर ऑपरेटरों के अनुसार, इस बार गर्मियों की छुट्टियों में पहाड़ों की ओर जाने वाले परिवारों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 35% का इजाफा हुआ है।
पसंदीदा डेस्टिनेशन: बरनाला के निवासियों की पहली पसंद शिमला, धर्मशाला, मैकलोडगंज, डलहौजी और खजियार बने हुए हैं।
एडवांस बुकिंग की होड़: शहर के मुख्य ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि मई के आखिरी हफ्ते से ही होटलों और टैक्सियों की एडवांस बुकिंग में भारी उछाल देखा गया। लोग बिना किसी पूर्व तैयारी के जाने से बच रहे हैं ताकि पहाड़ों में जाकर किसी तरह की परेशानी या महंगे होटलों का सामना न करना पड़े।
विद्वानों और विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना काल के बाद से लोगों में 'रिवेंज ट्रैवल' (लगातार घर में रहने के बाद बाहर घूमने की तीव्र इच्छा) और मानसिक शांति के लिए प्राकृतिक स्थानों पर जाने का चलन तेजी से बढ़ा है, और बरनाला इस बदलाव से अछूता नहीं है।
बरनाला के स्थानीय बाजार पड़े ठंडे, व्यापारिक गतिविधियों पर असर
पहाड़ों की तरफ बढ़ते इस कदर रुझान का सीधा असर बरनाला के स्थानीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। सदर बाजार, पुराना बाजार और मॉल रोड जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में दोपहर के समय सन्नाटा देखा जा सकता है।
कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स: जहां एक तरफ गर्मियों के सूती कपड़ों की बिक्री सामान्य है, वहीं दूसरी तरफ जैकेट, हल्के गर्म कपड़े और ट्रैकिंग गियर बेचने वाले दुकानदारों की चांदी हो रही है। लोग पहाड़ों की ठंड से निपटने के लिए बरनाला से ही जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक बाजार में उछाल: गर्मी से बचने के लिए जो लोग घर पर रह रहे हैं, वे एयर कंडीशनर और कूलर की खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि शाम के वक्त ही ग्राहक बाजारों का रुख कर रहे हैं।
ऑटोमोबाइल और गैरेज में बढ़ी भीड़: बरनाला के कार मैकेनिकों और सर्विस सेंटरों पर इन दिनों पैर रखने की जगह नहीं है। पहाड़ी रास्तों पर अपनी गाड़ियों से जाने वाले लोग ब्रेक, टायर, इंजन ऑयल, कूलेंट और गाड़ियों की फिटनेस की बारीकी से जांच करवा रहे हैं ताकि ऊंचे और घुमाव रास्तों पर कोई दुर्घटना या खराबी न हो।
स्वास्थ्य और जीवनशैली में बदलाव: डॉक्टरों की सलाह
पहाड़ों की यात्रा जितनी सुखद दिखती है, स्वास्थ्य के लिहाज से उतनी ही सावधानी की मांग करती है। बरनाला के सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने पहाड़ों पर जा रहे स्थानीय नागरिकों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य परामर्श (हेल्थ एडवाइजरी) जारी की है।
डॉ. जसबीर औलख पूर्व डिप्टी डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि मैदानी इलाकों से अचानक अत्यधिक ऊंचाई वाले और ठंडे क्षेत्रों में जाने से शरीर का तापमान और रक्तचाप प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से ब्लड प्रेशर और मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों को अपनी दवाइयां हमेशा साथ रखनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
चिकित्सकों ने यह भी सलाह दी है कि ऊंचाई पर जाने से कई लोगों को चक्कर आने या सांस लेने में तकलीफ (मोशन सिकनेस) की समस्या होती है, जिसके लिए पहले से ही चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक दवाइयां साथ रखनी जरूरी हैं।
प्रशासन की अपील: पर्यावरण और नियमों का रखें ध्यान
बरनाला जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने पहाड़ों की यात्रा पर जा रहे पर्यटकों से एक जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की है।
1. पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। बरनाला की एक प्रमुख पर्यावरण एन.जी.ओ. ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे पहाड़ों में प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट या अन्य कूड़ा-कचरा खुले में न फेंकें और केवल डस्टबिन का ही उपयोग करें।
2. सुरक्षित ड्राइविंग और यातायात नियम
पहाड़ी सड़कें मैदानी रास्तों से बिल्कुल अलग होती हैं। जिला पुलिस ने वाहन चालकों को पहाड़ों में ओवरटेकिंग से बचने, तेज गति से गाड़ी न चलाने और शराब पीकर वाहन न चलाने की सख्त हिदायत दी है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सहायता लेने का सुझाव दिया गया है।
एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
गर्मियों की छुट्टियां हर परिवार के लिए खुशियां और ताजगी लेकर आती हैं। बरनाला के लोगों का पहाड़ों की ओर यह रुख उनकी बदलती जीवनशैली और आर्थिक समृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, इस यात्रा को पूरी तरह से सुरक्षित और यादगार बनाने के लिए थोड़ी सी सावधानी, मौसम की सही जानकारी और स्थानीय नियमों का पालन बेहद जरूरी है। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में बिताए गए ये पल वाकई जीवनभर की मधुर याद बन सकते हैं।
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