Edited By Vatika,Updated: 25 Jul, 2021 11:28 AM

किसान आंदोलन के चलते पंजाब की सरकारी बसों का संपर्क दिल्ली से टूटने लगा है।
जालंधर(एन. मोहन): किसान आंदोलन के चलते पंजाब की सरकारी बसों का संपर्क दिल्ली से टूटने लगा है। राज्य की 40 से अधिक ए.सी. बसों का दिल्ली आना-जाना बंद कर दिया गया है जबकि सामान्य सरकारी बसें अभी भी चल रही हैं, परन्तु वह भी रिस्क लेकर और अवैध रूप से।
पंजाब से दिल्ली एयरपोर्ट तक सरकारी बसों के जाने की दिल्ली सरकार से होने वाली बातचीत भी फिलहाल किसान आंदोलन की भेंट चढ़ गई है। दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को अब महंगे किराए वाली निजी बसों व वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि बसें न चलने से सरकारी बसों के कर्मचारी बे-काम वाले हो रहे हैं। इसके चलते पनबस के मुनाफे में भी कमी आ रही है। दिल्ली सीमा पर किसानों के जमावड़े के चलते बसों को अन्य रास्तों से जाना पड़ता है, जोकि रूटीन के सफर से 40 किलोमीटर अधिक है। एक-एक बस पर करीब 15000 रुपए का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। इससे भी अधिक ङ्क्षचता इसी बात पर है कि जिस 40 किलोमीटर अलग रूट से बसें जा रही हैं, उस मार्ग का परमिट भी सरकारी बसों के पास नहीं है।
बस कर्मचारी इसी चिंता में हैं कि अगर इस अनाधिकारिक रूट पर कोई घटना अथवा दुर्घटना घट जाए तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होगा। इसे लेकर भी कर्मचारियों ने अपनी चिंता पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों समक्ष प्रकट की थी। ए.सी. बसों को बंद करने के पीछे अनाधिकारिक रूट और लम्बा मार्ग था, जिससे सरकार को प्रति बस घाटा हो रहा था। इस माह के प्रारम्भ में पंजाब सरकार की दिल्ली सरकार से पंजाब से दिल्ली एयरपोर्ट तक बसों को परमिट देने की बात भी होनी थी, जो आंदोलन के चलते रद्द हो गई। एक अनुमान के अनुसार किसान आंदोलन के चलते केवल पंजाब की सरकारी बसों को प्रति माह 2 करोड़ से अधिक का नुक्सान हो रहा है।