विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर भारी न पड़ जाए हिंदू नेताओं की अनदेखी

Edited By Sunita sarangal, Updated: 19 Jan, 2022 12:56 PM

hindu leaders congress in elections

वर्ष 2017 के चुनाव में हिन्दू वोटों के दम पर सत्ता में आई कांग्रेस में इस चुनाव के दौरान हिन्दुओं की अनदेखी हो रही है।

जालंधर(नरेश कुमार): वर्ष 2017 के चुनाव में हिन्दू वोटों के दम पर सत्ता में आई कांग्रेस में इस चुनाव के दौरान हिन्दुओं की अनदेखी हो रही है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने हिन्दू प्रभाव वाली 23 सीटों में से 20 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा के साथ सीधे मुकाबले वाली हिन्दू प्रभाव की 23 सीटों में से भाजपा मात्र 3 सीटें ही जीत पाई थी। लेकिन इस चुनाव में हिन्दू नेताओं की कांग्रेस में अनदेखी हो रही है। पंजाब में 38.69 प्रतिशत आबादी हिन्दू है और पिछले चुनाव में इसी हिन्दू वोट बैंक ने कांग्रेस की भूमिका बनाई थी और तमाम शहरी सीटों पर कांग्रेस इसी वोट बैंक के दम पर भाजपा पर भारी पड़ी थी।

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भाजपा ज्वाइन करने पर मजबूर हुई निमिषा
कांग्रेस की तेज-तर्रार प्रवक्ता और ब्राह्मण नेत्री निमिषा मेहता द्वारा गढ़शंकर में जमीनी स्तर पर पिछले पांच साल में काम किए जाने के बावजूद हिन्दू प्रभाव वाली यह सीट सिख उम्मीदवार अमरप्रीत लाली को दे दी गई। 2008 के डीलिमिटेशन से पहले यह सीट भाजपा के खाते में आती थी और 2002 के चुनाव में भाजपा के अविनाश राय खन्ना इस सीट पर चुनाव जीते थे। उस समय पंजाब में कांग्रेस की हवा के बावजूद भाजपा यह सीट बचाने में कामयाब रही थी। कंडी इलाके की इस सीट पर सारा शहरी वोटर हिन्दू है इसके बावजूद यह सीट निमिषा मेहता को देने की बजाय लाली को दे दी गई। इससे निराश होकर निर्मिषा मेहता ने भाजपा का दामन थाम लिया जिससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।

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अश्वनी की सीट पर बाजवा परिवार का दावा
बटाला से कांग्रेस के विधायक और 2002 की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री रहे अश्वनी सेखड़ी की दावेदारी को लेकर अब कांग्रेस में विवाद हो गया है। कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने कांग्रेस हाईकमान पर यह सीट अपने बेटे को देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बाजवा ने कहा कि यदि चौधरी संतोख सिंह के परिवार को 3 टिकटें दी जा सकती हैं तो उनके परिवार को एक और टिकट क्यों नहीं दी जा सकती। इससे पहले पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू बटाला में रैली के दौरान अश्वनी सेखड़ी को टिकट दिए जाने का समर्थन कर चुके हैं। लेकिन सेखड़ी की इस सीट पर बाजवा परिवार के दावे के बाद माझा के हिन्दुओं में गलत संदेश जा सकता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक बटाला में 56 प्रतिशत आबादी हिन्दू हैं जबकि सिख मतदाताओं की संख्या 37 प्रतिशत है। ऐसे में इस हिन्दू सीट पर विवाद के बाद कांग्रेस के प्रति हिंदुओं में गलत संदेश जा रहा है और इसका फायदा भाजपा को हो सकता है।

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रमन बहल को भी संभाल नहीं सकी कांग्रेस
गुरदासपुर से कांग्रेस के विधायक रहे खुशहाल बहल के बेटे रमन बहल भी कांग्रेस की इसी नीति के चलते उससे दूर हुए हैं और उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें गुरदासपुर सीट से मैदान में उतारा है। गुरदासपुर की 68.8 प्रतिशत आबादी हिन्दू है। कांग्रेस ने इस सीट पर मौजूदा विधायक बरिंदरजीत सिंह पाहड़ा को मैदान में उतारा है लेकिन रमन बहल को पार्टी के साथ जोड़े रखने के लिए कोई खास कोशिश नहीं की। रमन बहल 2012 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें 38335 वोट हासिल हुए थे।

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