Books खरीदने से पहले दें ध्यान, बड़ा रैकेट बेनकाब

Edited By Kalash,Updated: 05 Apr, 2025 06:38 PM

duplicate books racket exposed

एन.सी.ई.आर.टी. की डुप्लीकेट किताबें बिकने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है।

जालंधर (वरुण): एन.सी.ई.आर.टी. की डुप्लीकेट किताबें बिकने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। शहर में सिर्फ बाप-बेटा ही नहीं, बल्कि अन्य कई प्रिंटर भी इस धंधे में शामिल हैं। केवल एन.सी.ई.आर.टी. की ही नहीं, बल्कि स्टेट बोर्ड और अन्य कंपनियों की डुप्लीकेट किताबें भी कुछ प्रिंटर छापकर मार्कीट में बेच रहे हैं।

यह बात भी सामने आई है कि शहर में बड़े स्तर पर डुप्लीकेट किताबों का कारोबार चल रहा है, जिससे न केवल प्रशासन बल्कि संबंधित कंपनियां भी अनजान हैं। सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों के कुछ फील्ड कर्मचारी भी कथित तौर पर इन प्रिंटर्स के साथ मिले हुए हैं। ये कर्मचारी सच्चाई अपने उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाते, जिससे न केवल कंपनियों बल्कि सरकार को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, जालंधर के हाईवे पर स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस में एन.सी.ई.आर.टी. की डुप्लीकेट किताबें छापी जा रही थीं। इस काम में प्रिंटर का पिता मार्कीट से असली किताबें लेकर दुकानों से ऑर्डर लेता था, और फिर ऑर्डर के हिसाब से अपने बेटे की प्रिंटिंग प्रेस में नकली किताबें छपवाकर दुकानों पर डिलीवर करता था। कुछ साल पहले इसी प्रिंटर की प्रेस पर पुलिस ने रेड की थी, और थाना रामामंडी की पुलिस ने जाली किताबों के साथ प्रिंटर को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन यह मामला थाने में ही रफा-दफा हो गया था। वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे को पुलिस अब तक बेनकाब नहीं कर पाई है।

इस नेटवर्क के तार केवल पंजाब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पंजाब केसरी ने शहर में एन.सी.ई.आर.टी., स्टेट बोर्ड और अन्य कंपनियों की डुप्लीकेट किताबों की छपाई का मामला उठाया था। इसके बाद कुछ प्रिंटर्स और डुप्लीकेट किताबें बेचने वाले दुकानदारों ने एक बैठक कर नकली किताबें बेचने के तरीकों, समय और स्थान को निर्धारित कर लिया था। इसके अलावा, नकली किताबों का स्टॉक भी अलग-अलग जगहों पर छिपा दिया गया था।

इससे पहले, डीएवी कॉलेज के पास स्थित एक दुकान से एन.सी.ई.आर.टी. की 8वीं और 9वीं कक्षा की नकली किताबें बरामद की गई थीं। यह रेड खुद कंपनी ने करवाई थी, जिसमें नकली किताबें तो पकड़ी गईं, लेकिन पुलिस प्रिंटर तक नहीं पहुंच सकी थी।

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