Ludhiana: हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

Edited By Kamini,Updated: 02 Sep, 2026 03:19 PM

dc himanshu jain holds second review meeting under mission  jivani

जिले में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के सुरक्षित स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे 'मिशन जीवनी' के विशेष सघन अभियान की दूसरी समीक्षा बैठक डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

लुधियाना (राज): जिले में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के सुरक्षित स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे 'मिशन जीवनी' के विशेष सघन अभियान की दूसरी समीक्षा बैठक डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य 25 अगस्त को जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करना तथा हाई-रिस्क प्रेगनेंसी (HRPs - उच्च जोखिम वाले गर्भधारण) की ट्रैकिंग, टेलीफोनिक फॉलो-अप और प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना था। 

बैठक में ओएसडी डॉ. प्रगति वर्मा (IAS), सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप, जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. अमनप्रीत कौर, नोडल अधिकारी श्री जीवनदीप सिंह, सीजीओ श्री अंबर बंदोपाध्याय सहित लुधियाना जिले के सभी ब्लॉकों के सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स विशेष रूप से उपस्थित रहे। डिप्टी कमिश्नर और ओएसडी ने सभी एसएमओ को निर्देश दिए कि वे हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग के लिए संबंधित ब्लॉक स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट्स  के साथ मिलकर एक मासिक ड्यूटी रोस्टर तैयार करें। इस रोस्टर के तहत रोटेशनल आधार पर महिलाओं का नियमित टेलीफोनिक फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा।

इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर मंगलवार को एक विस्तृत 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' प्रस्तुत की जाए, जिसमें पिछले सप्ताह टेलीफोन के जरिए किए गए सभी फॉलो-अप की पूरी संख्या और विवरण दर्ज हो। बैठक में यह भी कड़ा निर्देश दिया गया कि यदि पहली एंटी-नेटल केयर  जांच के दौरान किसी महिला को सामान्य माना गया हो, लेकिन बाद में किसी जांच में वह हाई-रिस्क श्रेणी में पाई जाती है, तो उसे तुरंत फ्लैग कर HRP डेटा में शामिल किया जाए। यह महत्वपूर्ण जानकारी आशा वर्कर से एएनएम, एएनएम से एलएचवी और फिर ब्लॉक स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट तक तुरंत पहुंचाई जानी चाहिए। डीसी हिमांशु जैन ने स्पष्ट किया कि हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग सिर्फ एएनएम स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका स्तर एएनएम से एक से 2 स्तर ऊपर (सीनियर डॉक्टर्स/अधिकारियों द्वारा) किया जाना अनिवार्य है। 

एएनएम हर हाई-रिस्क केस की जानकारी तुरंत संबंधित एसएमओ को देंगी। इसके साथ ही एसएमओ को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली आशा वर्करों और एएनएम को हर हफ्ते संवेदनशील व प्रशिक्षित करने और प्रत्येक ब्लॉक से सबसे बेहतरीन काम करने वाली आशा वर्कर का नाम डीसी कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए। डीसी ने निर्देश दिया कि इलाज करने वाले डॉक्टर हर हाई-रिस्क मरीज को स्पष्ट रूप से समझाएं कि आगे के इलाज और डिलीवरी के लिए उसे किस स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाना है। इसके अलावा सभी एसएमओ अपने क्षेत्रों के निजी व सरकारी अस्पतालों तथा नर्सिंग होमों का नियमित निरीक्षण करेंगे। इस अभियान के दौरान कूम कलां और साहनेवाल ब्लॉकों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को 8 सितंबर तक अपनी अनुपालन रिपोर्ट डीसी कार्यालय को सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं। 

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here


 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!