PPCB के नाम पर खुलेआम उगाही का खेल! ड्राइवर बना ‘अधिकारी’

Edited By Urmila,Updated: 12 Jan, 2026 10:59 AM

blatant corruption in the name of ppcb

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) का नाम लेकर आर.ओ.-2 एरिया में खुलेआम उगाही और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है।

लुधियाना (राम): पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) का नाम लेकर आर.ओ.-2 एरिया में खुलेआम उगाही और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। हैरानीजनक है कि इस पूरे खेल का कथित सूत्रधार कोई अधिकारी नहीं, बल्कि बोर्ड का एक ड्राइवर बताया जा रहा है, जो खुद को कभी एस.डी.ओ. तो कभी एक्सीयन बताकर कारोबारियों को भ्रमित कर रहा है।

आरोप है कि यह व्यक्ति कारोबारियों से ‘हाथ मिलाने’ यानी अवैध लेन-देन की मांग करता है और बदले में फैक्टरियों को किसी भी तरह की कार्रवाई से बचाने का भरोसा देता है। सूत्रों के मुताबिक यह ड्राइवर आर.ओ.-2 क्षेत्र में सक्रिय है और फैक्टरी मालिकों को यह कहकर गुमराह करता है कि उन्हें कंसैंट लेने या प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े किसी नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है। जब तक ‘सैटिंग’ बनी रहेगी, तब तक पी.पी.सी.बी. का कोई अधिकारी या मुलाजिम फैक्टरी की तरफ झांकने तक नहीं आएगा।

जो कारोबारी पैसे देने से मना करता है, उसे धमकाया जाता है। कभी फैक्टरी सील करने की धमकी दी जाती है, तो कभी भारी जुर्माने और केस दर्ज कराने का डर दिखाया जाता है। सूत्र बताते हैं कि डर का माहौल बनाने के लिए यह ड्राइवर कई बार अपने साथ जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) या कभी-कभी एस.डी.ओ. स्तर के अधिकारियों को भी ले जाता है, ताकि कारोबारी यह समझें कि पूरा सिस्टम उसके साथ खड़ा है।

सूआ रोड, ग्यासपुरा और कंगनवाल रोड पर सवाल

सबसे गंभीर आरोप सुआ रोड, ग्यासपुरा और कंगनवाल रोड इलाके की फैक्टरियों को लेकर हैं। बताया जा रहा है कि इन इलाकों में कई ऐसी इकाइयां चल रही हैं, जो सरकार द्वारा प्रतिबंधित या बैन की गई वस्तुओं का निर्माण कर रही हैं। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि जिन फैक्टरी संचालकों ने ड्राइवर की मांग मान ली है, वहां न तो निरीक्षण होता है और न ही कोई नोटिस भेजा जाता है। वहीं जो नियमों के तहत काम करना चाहते हैं या अवैध भुगतान से इन्कार करते हैं, उन्हें बार-बार परेशान किया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले की कई शिकायतें पहले ही पी.पी.सी.बी. के उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं। कुछ कारोबारियों ने लिखित शिकायत भी दी है, जबकि कुछ ने मौखिक तौर पर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

सिस्टम की साख पर सवाल

यह मामला सिर्फ अवैध वसूली या एक ड्राइवर की मनमानी तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रदूषण नियंत्रण तंत्र की साख पर सवाल खड़ा करता है। पी.पी.सी.बी. जैसी संस्था का मकसद पर्यावरण की रक्षा और नियमों का सख्ती से पालन कराना है, लेकिन अगर उसी के नाम पर उगाही होने लगे, तो जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।  अब सवाल यह है कि क्या पी.पी.सी.बी. के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जब पी.पी.सी.बी. के चीफ इंजीनियर आर.के. रतड़ा से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा।

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