Edited By Urmila,Updated: 23 Nov, 2025 01:56 PM

चंडीगढ़ मामले में छिड़े सियासी तूफान के बीच केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। केंद्र सरकार ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि वह शीतकालीन सत्र में कोई बिल नहीं ला रही है।
पंजाब डेस्क : चंडीगढ़ के भविष्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। कई लोग यह आशंका जता रहे थे कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है — जिससे पंजाब और हरियाणा के पारंपरिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
इन चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा। गृह मंत्रालय की तरफ से बयान जारी कर कहा कि संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ से संबंधित कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल करने का प्रस्ताव अभी सिर्फ विचाराधीन है, और इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि प्रस्ताव में चंडीगढ़ की शासन व्यवस्था बदलने, या पंजाब और हरियाणा के ऐतिहासिक और प्रशासनिक संबंधों में हस्तक्षेप करने का कोई पहलू शामिल नहीं है। बयान में कहा गया है कि चंडीगढ़ के हित सर्वोपरि हैं, और किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि इस मुद्दे को लेकर घबराने या भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में इस विषय से संबंधित कोई बिल लाने की कोई मंशा भी नहीं है।

असल मुद्दा क्या था?
हाल के दिनों में ऐसे दावे सामने आए थे कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ पर सीधे नियंत्रण बढ़ाने और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करने जा रही है, जिससे पंजाब और हरियाणा की हिस्सेदारी या अधिकारों पर असर पड़ सकता है। इन दावों ने लोगों में चिंता पैदा कर दी थी — खासकर चंडीगढ़ में रहने वाले नागरिकों के बीच, जो इस बदलाव के संभावित प्रभावों को लेकर असमंजस में थे।
सरकार का यह आधिकारिक स्पष्टीकरण उन अफवाहों और अटकलों पर विराम की तरह सामने आया है। अभी के लिए तस्वीर साफ है — चंडीगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था, राज्यों के संबंध और मौजूदा ढांचा वैसा ही बना रहेगा। भविष्य में किसी भी बदलाव पर फैसला लेने से पहले सभी पक्षों की राय को महत्व दिया जाएगा
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