चंडीगढ़ से आई विजीलैंस की टैक्नीकल टीम ने खंगाला नगर निगम का रिकार्ड

Edited By swetha,Updated: 19 Sep, 2019 08:44 AM

vigilance s technical team checked municipal corporation s record

पूर्व पार्षद देसराज जस्सल द्वारा आज से करीब 10 साल पहले बनी मकसूदां रोड के निर्माण को लेकर घपलेबाजी का जो आरोप अकाली-भाजपा नेताओं पर लगाया था, की जांच विजीलैंस द्वारा अभी तक की जा रही है।

जालंधर(खुराना/ स.ह.): पूर्व पार्षद देसराज जस्सल द्वारा आज से करीब 10 साल पहले बनी मकसूदां रोड के निर्माण को लेकर घपलेबाजी का जो आरोप अकाली-भाजपा नेताओं पर लगाया था, की जांच विजीलैंस द्वारा अभी तक की जा रही है। चंडीगढ़ से आई विजीलैंस की टैक्नीकल टीम ने इस क्षेत्र में जांच के दौरान सड़क के सैंपल भरे हैं। इस टीम में एक्सियन गौहर आलम, डी.एस.पी. विजीलैंस निरंजन सिंह, इंस्पैक्टर मनदीप सिंह सहित कई अन्य अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने मकसूदां से सुरानुस्सी व मकसूदां से कम्पनी बाग तक की रोड की जांच भी की। 

इससे पहले विजीलैंस की टीम अचानक नगर निगम पहुंची जिसकी सूचना मिलते ही निगम में हड़कंप मच गया। कई अधिकारी व कर्मचारी तो अपनी सीटें छोड़कर इधर-उधर भाग खड़े हुए। टीम के सदस्यों ने बी. एंड आर. विभाग में जाकर सड़क घोटाले संबंधी रिकार्ड को खंगाला। निगम के एक्सियन व अन्य अधिकारियों ने विजीलैंस टीम को जो रिकार्ड चाहिए था, वह सौंप दिया है।  

गौरतलब है कि वर्ष 2010-11 में जब निगम ठेकेदार विनोद गुलाटी ने 3.75 करोड़ की लागत से मकसूदां रोड से कम्पनी बाग रोड का निर्माण किया था, तब इसे काफी समय तक अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण घपलेबाजी के आरोप लगे थे, जिसकी फाइल पहले ही विजीलैंस के पास है। उसी समय दौरान निगम के दूसरे ठेकेदार विकास बांसल ने शहर में डिवाइडरों का निर्माण किया था जिस पर करीब 7 करोड़ की लागत आई थी।

 निगम में आई विजीलैंस टीम ने यह भी जानना चाहा कि ठेकेदार विकास बांसल ने डिवाइडरों के निर्माण हेतु जो पेमैंट ली, उसमें कहीं मकसूदां रोड पर बने डिवाइडरों की पेमैंट तो शामिल नहीं थी क्योंकि ठेकेदार विनोद गुलाटी ने भी इस विवादित सड़क पर डिवाइडरों का निर्माण उसी कार्यकाल दौरान हुआ दिखाया और उसकी पेमैंट वसूली है। अब विजीलैंस टीम क्या निष्कर्ष निकालती है, इसी पर घोटाले का आधार टिका हुआ है। वहीं आज भी मकसूदां की रोड बदहाल ही है। कुछ माह पूर्व भी बनाई गई मकसूदां रोड को आधा-अधूरा बनाया गया है। एक साइड की रोड भी आधी बनी है और आधी गड्ढों से भरी है, जिसकी विजीलैंस को जांच करनी चाहिए। हैरानीजनक बात यह है कि विजीलैंस विभाग की जांच किस हद तक धीमी चल रही है। जानकार बताते हैं कि अगर एक सड़क के मामले में विजीलैंस कई वर्षों बाद भी किसी प्रकार की फाइनल रिपोर्ट नहीं बना पाई और आज भी सैंपल ही भरे जा रहे हैं तो बड़े केसों मे कैसे लोगों को न्याय विजीलैंस द्वारा मिलता होगा? 

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