अमेरिका-ईरान तनाव के बीच LPG खपतकारों के लिए अहम खबर

Edited By Kalash,Updated: 02 May, 2026 05:32 PM

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति लाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में अब भी सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी है।

जालंधर (धवन): अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति लाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में अब भी सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी है। अंतर्राष्ट्रीय एजैंसियों की रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज से होकर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जबकि भारत की एलपीजी आयात निर्भरता का अधिकांश भाग भी इसी समुद्री रास्ते पर टिका हुआ है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब देश के आम गैस उपभोक्ताओं की रसोई तक पहुंच चुका है। तेल-गैस की आपूर्ति न होने से महंगाई बढ़ रही है।

शहर में पिछले डेढ़ महीने से घरेलू गैस सिंलैंडरों की सप्लाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित दिखाई दे रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक उपभोक्ताओं को कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। गैस एजैंसियों के बाहर लगातार शिकायतें बढ़ रही हैं, ऑनलाइन बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं को भी समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग कराने के बावजूद सिलेंडर तय समय पर नहीं पहुंच रहे और कई बार एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।

ग्रामीण इलाकों में गैस उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में लगभग एक महीने का अंतर पड़ रहा है। गांवों में रहने वाली महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है क्योंकि खाना बनाने के लिए उन्हें या तो पड़ोसियों से गैस मांगनी पड़ रही है या फिर मजबूरी में लकड़ी और चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है।

कई गांवों में ऐसे हालात बन गए हैं कि गैस खत्म होने के बाद नया सिलैंडर आने तक परिवारों को अस्थायी रूप से पारंपरिक ईंधन पर लौटना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है बल्कि धुएं और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी बढ़ रही हैं।

शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। शहरों में उपभोक्ताओं को सिलैंडर बुक करने के बाद करीब 20 दिन या उससे अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। पहले जहां बुकिंग के 3 से 5 दिन के भीतर डिलीवरी हो जाती थी, वहीं अब उपभोक्ताओं को लगातार "स्टॉक नहीं आया", "ट्रक रास्ते में है", "सप्लाई रुकी हुई है" जैसे जवाब दिए जा रहे हैं। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें गैस खत्म होने से पहले ही दूसरा सिलेंडर बचाकर रखना पड़ रहा है क्योंकि यह भरोसा नहीं कि नया सिलैंडर समय पर मिलेगा या नहीं।

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि देश में गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही। कई स्थानों पर एजेंसियों ने बुकिंग अंतराल भी बढ़ा दिया है, जिससे उपभोक्ता चाहकर भी जल्दी दोबारा सिलैंडर बुक नहीं करा पा रहे। हाल ही में जारी रिपोर्टों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में बुकिंग गैप बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई चक्र लंबा होने की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की तरफ से इस गंभीर स्थिति पर कोई स्पष्ट मॉनिटरिंग दिखाई नहीं दे रही। न तो गैस एजेंसियों पर डिलीवरी की समय सीमा तय कराई जा रही है और न ही उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।

उपभोक्ता लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रशासन गैस एजेंसियों से वास्तविक स्टॉक रिपोर्ट सार्वजनिक करवाए, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग सप्लाई शैड्यूल तय करे तथा आपातकालीन स्थिति में अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध करवाए, लेकिन अभी तक प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी बनी हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि अमरीका-ईरान तनाव जल्द कम नहीं हुआ और होर्मुज मार्ग पर पूरी तरह सामान्य आवागमन बहाल नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल शहर हो या गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है गैस सिलैंडर आखिर समय पर कब मिलेगा।

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