यह है मुगल नूरदीन की कब्र, जहां आज भी लोग मारते हैं जूते

Edited By Vatika,Updated: 13 Jan, 2020 11:25 AM

this is the tomb of mughal noordin

श्री मुक्तसर साहिब से संबंधित इतिहास में एक ऐसे मुगल की कब्र का जिक्र भी विशेष तौर पर आता है जिस पर आज भी लोग जूते मारते हैं। यह कब्र नूरदीन मुगल की है।

श्री मुक्तसर साहिब(तनेजा): श्री मुक्तसर साहिब से संबंधित इतिहास में एक ऐसे मुगल की कब्र का जिक्र भी विशेष तौर पर आता है जिस पर आज भी लोग जूते मारते हैं। यह कब्र नूरदीन मुगल की है। 

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नूरदीन की कब्र श्री दरबार साहिब से करीब अढ़ाई किलोमीटर दूर गुरुद्वारा टिब्बी साहिब से थोड़ा आगे और गुरुद्वारा दातणसर के बिल्कुल नजदीक है। माघी के ऐतिहासिक मेले दौरान आने वाले श्रद्धालुओं में से बहुत से सिख श्रद्धालु इस स्थान के दर्शन करने के लिए आते हैं और कब्र पर जूते मारते हैं। इतिहास के अनुसार श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी जब चमकौर साहिब से चल कर मालवा क्षेत्र में पहुंचे तो कागन के स्थान पर उनके दरबार में बहुत-से सिख योद्धों की भीड़ होने लगी। इस दौरान मुगल जासूस नूरदीन, जो सूबा सरहिन्द और दिल्ली की हुकूमत के इशारे पर भेस बदल कर गुरु जी का पीछा कर रहा था, सिख बन कर गुरु साहिब के नजदीक रहने लगा परन्तु उसका दाव नहीं लगा।

जब गुरु साहिब खिदराने की ढाब (अब श्री मुक्तसर साहिब) पहुंचे तो वह मुगल के साथ आ गया। वह स्थान अब गुरुद्वारा दातणसर साहिब बना हुआ है। जब गुरु साहिब जंग से अगले दिन सुबह दातुन करने लगे तो पीछे से उस मुगल ने तलवार के साथ गुरु जी पर हमला कर दिया। इस दौरान गुरु साहिब ने फुर्ती के साथ उसका वार रोक दिया और उसके मुंह पर लोहे का गड़वा मार कर उसे वहीं खत्म कर दिया। बाद में नूरदीन की वहां कब्र बना दी गई और लोग उस कब्र पर जूते मारते हैं। नूरदीन की कब्र को लोग जूते मार-मार कर गिरा देते हैं और फिर दोबारा कब्र तैयार कर दी जाती है। 

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