Edited By Subhash Kapoor,Updated: 13 May, 2026 07:00 PM

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की अगुवाई में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से करवाने के फैसले को बदलने की मांग की।
जालंधर : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की अगुवाई में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से करवाने के फैसले को बदलने की मांग की। इस मौके पर उनके साथ कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ नेता विजय सांपला, सोम प्रकाश, मनोरंजन कालिया, अविनाश राये खन्ना, राकेश राठौड़ व विनीत जोशी भी मौजूद थे।
सुनील जाखड़ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार राज्य चुनाव आयोग के साथ मिलकर पंचायती राज संस्थाओं की तरह स्थानीय निकाय चुनावों को लूटने की साजिश के तहत यह नियम लेकर आई है। उन्होंने कहा कि पिछले लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम मशीनों से होते रहे हैं, लेकिन चुनावों की घोषणा के बाद रातों-रात सरकार के निर्देशों पर काम कर रहे चुनाव आयोग ने ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव करवाने का फैसला कर लिया।
उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर यह परंपरा रही है कि चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की जाती है, लेकिन इस बार ऐसा भी नहीं किया गया। इसके अलावा तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि मतदान ईवीएम से होगा, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने अपनी संभावित हार देखकर यह फैसला बदल दिया, ताकि वोटों की गिनती के समय गड़बड़ी की जा सके और लोकतंत्र की हत्या कर चुनावों को लूटा जा सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के दौरान जैसे पटियाला में एक पुलिस अधिकारी की ऑडियो कॉल वायरल हुई थी, उससे साफ हो गया था कि आम आदमी पार्टी सरकार ने वे चुनाव किस तरह लूटे थे और अब वही खेल स्थानीय निकाय चुनावों में दोहराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा इसका डटकर विरोध करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बीते कल तक आरक्षित वार्ड बदले जा रहे थे। कई स्थानों पर लोगों को मतदाता सूची नहीं मिल रही है, जबकि वार्डबंदी में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं।
सुनील जाखड़ ने कहा कि चुनाव आयुक्त अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तुरंत अपना फैसला बदलें और नियमों तथा समय-समय पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार परंपरा के मुताबिक ईवीएम से ही मतदान करवाया जाए।