महाशिवरात्रि पर ‘Shivalik Hills’ को लेकर बड़े मोर्चे की शुरुआत, पहाड़ों की रक्षा की उठी आवाज

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 15 Feb, 2026 07:33 PM

shivalik morcha launched on mahashivratri

पब्लिक एक्शन कमेटी, मत्तेवाड़ा (PAC) ने आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर “शिवालिक मोर्चा” की औपचारिक शुरुआत की। यह जन अभियान शिवालिक पहाड़ियों की रक्षा के लिए समर्पित है, जिन्हें पारंपरिक रूप से भगवान शिव का निवास माना जाता है और पर्यावरण विज्ञान के...

लुधियाना | 

पब्लिक एक्शन कमेटी, मत्तेवाड़ा (PAC) ने आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर “शिवालिक मोर्चा” की औपचारिक शुरुआत की। यह जन अभियान शिवालिक पहाड़ियों की रक्षा के लिए समर्पित है, जिन्हें पारंपरिक रूप से भगवान शिव का निवास माना जाता है और पर्यावरण विज्ञान के अनुसार पंजाब की सबसे संवेदनशील तथा कटाव-प्रभावित पहाड़ी पट्टी माना जाता है।

“शिवालिक” नाम का संबंध भगवान शिव से जोड़ा जाता है। हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं में ये पहाड़ियां पवित्र हैं — संतुलन, संयम और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक। पीढ़ियों से ये तलहटियां प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की निशानी रही हैं।

पब्लिक एक्शन कमेटी ने जोर देकर कहा कि शिवालिक केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पंजाब के लिए एक प्राकृतिक रक्षा-कवच हैं। ये मिट्टी के कटाव और अचानक जल प्रवाह से सुरक्षा प्रदान करती हैं। मैदानी इलाकों के लिए भूजल का महत्वपूर्ण रिचार्ज क्षेत्र हैं। जैव-विविधता को सहारा देने वाला वन वातावरण प्रदान करती हैं। निचले क्षेत्रों की खेती और आबादी के लिए पर्यावरणीय ढाल का कार्य करती हैं।

एक सदी से अधिक पहले अंग्रेज़ सरकार ने इन पहाड़ियों की नाजुकता को समझते हुए पंजाब भूमि संरक्षण कानून (PLPA) लागू किया था, ताकि इन क्षेत्रों को अनियंत्रित दोहन से बचाया जा सके। उस समय भी यह समझ लिया गया था कि यदि शिवालिक तलहटियां अस्थिर हो गईं, तो मैदानी इलाकों की कृषि और जल सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। शिवालिकों को एक ऐसी प्राकृतिक प्रणाली के रूप में माना गया, जिसका वास्तविक मूल्य उसकी सुरक्षा में है — ठीक उसी मुर्गी की तरह जो सोने के अंडे देती है।

पब्लिक एक्शन कमेटी ने बताया कि हालिया नीतिगत निर्णयों के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण और नियमितीकरण की अनुमति देने से गंभीर पर्यावरणीय चिंताएं उत्पन्न हुई हैं। बिना व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन के ऐसे नाजुक क्षेत्रों में स्थायी ढांचे, सड़कों का पक्का निर्माण, ढलानों में बदलाव और भूमि का विभाजन दीर्घकालिक और अपूरणीय नुकसान का कारण बन सकता है।

मामला इस समय न्यायालय में विचाराधीन है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अगले आदेश तक संबंधित अधिसूचना के तहत किसी भी प्रकार की आवंटन या अनुमति न देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इस नीति को चुनौती देने वाली रिट याचिका माननीय हाई कोर्ट में भी विचाराधीन है।

पब्लिक एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया कि शिवालिक मोर्चा विकास के खिलाफ नहीं है। यह ऐसे विकास का समर्थन करता है जो पर्यावरण कानूनों, वैज्ञानिक अध्ययनों और संवैधानिक जिम्मेदारियों का पूर्ण पालन करता हो।

कमेटी ने कहा, “शिवालिक पंजाब की अंतिम पर्यावरणीय ढाल हैं। यदि ये पहाड़ियां अस्थिर हुईं, तो इसका प्रभाव केवल ढलानों तक सीमित नहीं रहेगा — यह मिट्टी की गुणवत्ता, जल सुरक्षा और मैदानी क्षेत्रों की आपदा से लड़ने की क्षमता पर भी पड़ेगा।” शिवालिक मोर्चे के माध्यम से पब्लिक एक्शन कमेटी, मत्तेवाड़ा शिवालिक पट्टी में वन और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के सख्त पालन की मांग करेगी। किसी भी स्थायी भूमि उपयोग परिवर्तन से पहले वैज्ञानिक और पारदर्शी मूल्यांकन की वकालत करेगी। नागरिकों, धार्मिक नेताओं, किसानों और विशेषज्ञों को इस नाजुक क्षेत्र की रक्षा के लिए एकजुट करेगी। आने वाली पीढ़ियों के लिए संभावित पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी और पब्लिक एक्शन कमेटी ने पंजाब के नागरिकों से अपील की है कि वे शिवालिक पहाड़ियों की पवित्र विरासत और पर्यावरण की रक्षा के लिए एकजुट हों।

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