Edited By Urmila,Updated: 06 Sep, 2026 03:55 PM

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने विदेशों में, खासकर कनाडा और अमेरिका में सिख समुदाय और धार्मिक जगहों के खिलाफ नफरत की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
अमृतसर (गुरप्रीत): शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने विदेशों में, खासकर कनाडा और अमेरिका में सिख समुदाय और धार्मिक जगहों के खिलाफ नफरत की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। इस मौके पर एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी जी ने कहा कि सिख धर्म का मुख्य संकल्प 'सरबत दे भले' पर आधारित है।
इसमें किसी के प्रति नफरत, जाति या ऊंच-नीच की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि जब साहिब श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुशब्द की नींव रखी थी, तब भी विरोध हुआ था, लेकिन गुरुओं ने इंसानियत को सच्चाई और बराबरी का रास्ता दिखाया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सभी के लिए सांझे हैं, जिसमें भगतों, भाटों और गुरसिखों की बानी दर्ज है। हर सिख रोजाना की अरदास के अंत में 'नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाने सरबत दा भला' मांगता है।
एडवोकेट धामी ने कनाडा सरकार से खास अपील करते हुए कहा कि पंजाबी वहां दूसरी सबसे बड़ी भाषा के तौर पर जानी जाती है। आज ग्लोबलाइजेशन के दौर में कनाडा और अमेरिका की अर्थव्यवस्था और तरक्की में सिखों का बहुत बड़ा योगदान है। एक समय था जब पंजाब के बाहर से पैसा आता था, लेकिन आज पंजाबी वहां बड़े बिजनेस लगा रहे हैं और वहां के विकास में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि धर्म के ज्ञान के खिलाफ नफरत और घृणा फैलाने वाले कुछ तत्व ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। सरकारों को ऐसी बुरी घटनाओं को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि सिख धर्म की खूबसूरती यही है कि यह गुरुशब्द की शरण में आने वाले हर इंसान को गले लगाकर बख्श लेता है।
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