Edited By Sunita sarangal,Updated: 30 Jul, 2026 04:14 PM

बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि हर साल बरसात के दौरान यही हालात बनते हैं, लेकिन न तो नालों की सफाई होती है और न ही पानी निकासी का कोई स्थायी प्रबंध किया जाता है।
नूरपुरबेदी(संजीव भंडारी): आधी रात को हुई मूसलाधार बारिश ने नूरपुरबेदी शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। महज कुछ घंटों की बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। सबसे अधिक मार बंगाला बस्ती के गरीब परिवारों और नूरपुरबेदी स्थित 138 गांवों के किसानों के लिए स्थापित ब्लॉक कृषि कार्यालय पर पड़ी।
बंगाला बस्ती में दो से तीन फुट पानी भर जाने के कारण दर्जनों परिवारों को अपनी झुग्गियां छोड़कर सड़क किनारे दुकानों के शेडों के नीचे जागकर पूरी रात गुजारनी पड़ी, जबकि ब्लॉक कृषि कार्यालय नूरपुरबेदी में ढाई फुट पानी घुसने से सरकारी रिकॉर्ड, नए बनने वाले प्लांट क्लिनिक के लिए आई महंगी मशीनें, नया फर्नीचर और करीब 80 क्विंटल गेहूं का बीज पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। भारी बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहर में वर्षा जल निकासी को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
बंगाला बस्ती में बाढ़ जैसे हालात, लोगों का अनाज और घरेलू सामान बर्बाद
बंगाला बस्ती में पानी का स्तर दो से तीन फुट तक पहुंच गया। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर और अन्य कीमती सामान पानी में डूब गया। हालात इतने खराब हो गए कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत दर्जनों परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सड़क किनारे शेडों के नीचे शरण लेनी पड़ी। सुबह लोग भूखे पेट अपने घरों से पानी निकालते नजर आए।

भारी त्रासदी के चलते बच्चे स्कूल व मजदूर काम पर नहीं जा सके
इस अव्यवस्था के कारण बंगाला बस्ती के बच्चे स्कूल नहीं जा सके और दिहाड़ी मजदूर अपनी रोजी-रोटी से वंचित रहे। बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि हर साल बरसात के दौरान यही हालात बनते हैं, लेकिन न तो नालों की सफाई होती है और न ही पानी निकासी का कोई स्थायी प्रबंध किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
कृषि कार्यालय बना तालाब, लाखों का हुआ नुकसान
सुबह जब ब्लॉक कृषि कार्यालय नूरपुरबेदी का स्टाफ ड्यूटी पर पहुंचा तो पूरा कार्यालय पानी में डूबा हुआ था। कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से सरकारी रिकॉर्ड को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए, लेकिन काफी दस्तावेज पानी में खराब हो गए। कार्यालय में बनने वाले नए प्लांट क्लिनिक के लिए आई महंगी मशीनें, फर्नीचर और करीब 80 क्विंटल गेहूं का बीज भी बर्बाद हो गया। कृषि उप निरीक्षक शमशेर सिंह ने बताया कि नुकसान की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।

25 लाख की मंजूरी के बावजूद कृषि कार्यालय की नई इमारत नहीं बनी
विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि कार्यालय की इमारत को काफी समय पहले असुरक्षित घोषित किया जा चुका है और नई इमारत के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस समय कार्यालय के तीन कमरों की छतों से भी पानी टपक रहा है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है, जबकि अधिकारियों ने अगस्त महीने में काम शुरू होने का भरोसा दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते नई इमारत बन जाती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था। निचले स्तर पर बना यह कार्यालय हर बार बारिश में परेशानी का केंद्र बन जाता है।
सोनी मॉडल स्कूल के पास के मोहल्ले में भी घरों में घुसा पानी
शहर के सोनी मॉडल स्कूल मोहल्ले में भी पहाड़ी क्षेत्र से आया पानी घरों में घुस गया। मोहल्ला निवासी सौरव ने बताया कि पिछले साल भी ऐसी ही तबाही हुई थी, लेकिन प्रशासन ने पानी निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी कारण इस बार भी दो से ढाई फुट पानी भरने से कई परिवारों के घरों में पानी घुस गया और उनका भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कई बार तो ऐसा महसूस होता है मानो हम इस देश के नागरिक ही नहीं हैं।

नूरपुरबेदी के वाटर सप्लाई कार्यालय में भी भारी मात्रा में भरा पानी
इस बारिश के दौरान नूरपुरबेदी के वाटर सप्लाई कार्यालय परिसर में भी भारी मात्रा में पानी जमा हो गया। अपने कार्यों के लिए आए उपभोक्ताओं को कार्यालय परिसर में पानी भरा होने के कारण निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वहीं विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कार्यालय में प्रवेश करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान कर्मचारी बारिश के कारण कार्यालय में हुए नुकसान का जायजा लेते रहे।
कुंभकर्णी नींद सोया प्रशासन पीड़ित परिवारों तक जल्द राहत पहुंचाए : अश्वनी शर्मा
जिला कांग्रेस कमेटी रूपनगर के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि नूरपुरबेदी में हर वर्ष बरसात के दौरान लोगों को इसी तरह की त्रासदी झेलनी पड़ती है, लेकिन सरकार और प्रशासन केवल कागजी दावों तक ही सीमित रहते हैं। उन्होंने कहा कि बंगाला बस्ती के गरीब परिवारों का अनाज, घरेलू सामान और रोजी-रोटी पानी की भेंट चढ़ गई है, जबकि ब्लॉक कृषि कार्यालय को भी भारी सरकारी नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा, मुफ्त राशन और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही पानी निकासी के लिए स्थायी ड्रेनेज योजना बनाकर जल्द लागू की जाए तथा ब्लॉक कृषि कार्यालय की नई इमारत का निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस पार्टी प्रभावित लोगों के हक में सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगी।
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