आखिर रविदास समाज पर क्यों डाले जा रहे हैं डोरे ?

Edited By Sunita sarangal, Updated: 22 Jan, 2022 03:21 PM

ravidas samaj makes a deep impact on elections

पंजाब में वैसे तो पहले भी दो बार विधानसभा चुनाव स्थगित हो चुके हैं, लेकिन इस बार चुनावों की तारीख बदला जाना एक बड़ा घटनाक्रम है। चुनावों......

जालंधर(अनिल पाहवा) : पंजाब में वैसे तो पहले भी दो बार विधानसभा चुनाव स्थगित हो चुके हैं, लेकिन इस बार चुनावों की तारीख बदला जाना एक बड़ा घटनाक्रम है। चुनावों की तारीख को लेकर चुनाव आयोग ने जो बदलाव किया है, उसके पीछे एक बड़ा कारण है श्री गुरु रविदास जयंती, जिसके चलते 14 फरवरी को पंजाब में होने वाले चुनाव 20 फरवरी को तय कर दिए गए। आखिर क्या कारण है कि चुनाव आयोग से लेकर पंजाब के राजनीतिक दल तक सभी चुनावों से पहले रविदास समाज पर डोरे डाल रहे हैं। इस सबके पीछे एक बड़ा कारण जिसका पूरा दारोमदार पंजाब के दलित समाज पर है।

आंकड़ों में रविदासीय समाज
पंजाब में रविदास समाज का एक बड़ा स्थान है तथा दोआबा रीजन में इस समाज की बड़ी पकड़ है। पंजाब में दलित समुदाय की संख्या 32 प्रतिशत है। राज्य की 117 सीटों में से दोआबा की 23 सीटें ऐसी हैं, जहां पर दलित समाज की मजबूत पकड़ है। आंकड़ों के अनुसार दोआबा क्षेत्र की 52 लाख आबादी में से 37 प्रतिशत दलित आबादी है। दोआबा में कुल दलित समाज में 60 प्रतिशत रविदासीय समाज, जबकि 40 प्रतिशत वाल्मीकि और मजहबी समुदाय के लोग हैं। आंकड़ों का यह ताना-बाना राज्य में रविदास समाज को मजबूत बनाने के लिए काफी है।

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दलित समाज के आसपास सियासत
पंजाब में दलित समाज के आसपास ही सियासत चलती है। कांग्रेस ने जहां दलित समाज से संबंधित चरणजीत सिंह चन्नी को सी.एम. बना दिया, वहीं पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने बसपा के साथ गठबंधन कर डिप्टी सी.एम. का पद दलित नेता को देने की पेशकश की है। राज्य में फिलहाल भाजपा की तरफ से दलित वर्ग को ऊपर उठाने के लिए कोई खास पत्ते अभी नहीं खोले गए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में दलित चेहरे के तौर पर पहले ही हरपाल चीमा को बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है।

अब तक के चुनावों में दलित समाज पर पकड़
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनावों में लगभग सभी राजनीतिक दल दलित वोट बैंक हासिल करने में काफी हद तक कामयाब रहे थे, लेकिन सबसे बड़ा आंकड़ा कांग्रेस के पास ही था। कांग्रेस ने पंजाब में दलित समाज से संबंधित 21 सीटों पर विजय हासिल की थी तथा पार्टी को दलित समाज से हासिल होने वाले वोट का प्रतिशत 36.63 था। दूसरे नम्बर पर आम आदमी पार्टी रही, जिसने 28 प्रतिशत वोट हासिल कर दलित समाज से संबंधित 9 सीटें जीती थीं। अकाली दल ने 3 सीटों पर कब्जा किया, जबकि उसका वोट प्रतिशत 24.57 था। इस मामले में बहुजन समाज पार्टी सबसे पीछे रही तथा उसे दलित समाज का सिर्फ 2.27 प्रतिशत वोट हासिल हुआ।

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दलित समाज पर डेरा इफैक्ट
दोआबा रीजन में रविदास समाज बड़ी संख्या में डेरा सच्चखंड बल्लां का अनुयायी है। एक आंकड़े के अनुसार दोआबा क्षेत्र में करीब 12 लाख रविदास समाज से संबंधित लोग हैं और ये लोग सच्चखंड बल्लां के अनुयायी हैं। बाबा संत पीपल दास ने डेरा सच्चखंड बल्लां की स्थापना की थी तथा उनके बाद लगातार इस डेरे का विकास हो रहा है। राजनीतिक तौर पर सिर्फ दलित नेता ही नहीं, बल्कि हर वर्ग के नेता डेरा सच्चखंड बल्लां पर निर्भर रहते हैं। हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू सहित कई नेता डेरे में आशीर्वाद के लिए आ चुके हैं।

दोआबा क्षेत्र की राजनीति

प्रमुख इलाके - जालंधर, कपूरथला, नवांशहर, होशियारपुर

कुल विधानसभा सीटें - 23

कुल आबादी - 52 लाख

दलित आबादी - 20 लाख

डेरा सच्चखंड बलां के अनुयायी - 12 लाख

(आंकड़ा 2011 जनसंख्या के आधार पर)

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