क्या कांग्रेस ने पंजाबियों की नब्ज पहचानने में की चूक? नई टीम को लेकर उठने लगे बड़े सवाल

Edited By Kamini,Updated: 02 Jul, 2026 04:59 PM

questions begin to arise regarding the new punjab congress team

कांग्रेस पार्टी के अन्दर चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए पार्टी हाई कमांड की ओर से लम्बे समय से प्रयास किए रहे थे। 3 मैंबरी टीम की ओर से पंजाब के लीडरों को बुलाकर उनके सुझाव लिए जा रहे थे।

होशियारपुर (घुम्मण) : कांग्रेस पार्टी के अन्दर चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए पार्टी हाई कमांड की ओर से लम्बे समय से प्रयास किए रहे थे। 3 मैंबरी टीम की ओर से पंजाब के लीडरों को बुलाकर उनके सुझाव लिए जा रहे थे। जब पंजाब कांग्रेस कमेटी की नई लिस्ट जारी की गई तो उस में से यह बात सामने आई, क्या कांग्रेस हाई कमांड ने पंजाबियों के स्वभाव को समझने की कोशिश नहीं की जो तंज विरोधी पार्टियां कांग्रेस को घेरने पर कस रही हैं, लगता है कि उनको कहीं न कहीं अनदेखा किया गया। 

आज पंजाब की सता हासिल करने की लड़ाई किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं है। पहले अकाली-भाजपा तथा कांग्रेस के मध्य टक्कर होती थी, आज स्थिति बदल चुकी है। भाजपा पंजाब के अन्दर अलग चुनाव लड़ना चाहती है। उनकी ओर से पंजाब के अन्दर अपना मजबूत आधार बनाने की कोशिश की जा रही है। शिरोमणि अकाली दल एक धार्मिक पार्टी है, पंजाब के अन्दर जिसका पहले ही मजबूत आधार है तथा आज सता पक्ष भी अपना दावा कर रही है। पंजाब के लोग तथा वर्कर कांग्रेस पार्टी की हाई कमांड की तरफ देख रहे थे कि कुछ नया करेंगे, किस व्यक्ति को पंजाब प्रधान बनाया जाता है जिससे कि कांग्रेस पार्टी की एक लहर बन सके। लगता है कि वर्कर यह समझ रहे हैं कि कहीं न कहीं यह दफ्तरी फैसला है।

पंजाब के लोगों को चाहिए था कि उसको मुख्य रखकर नहीं किया गया। पंजाब के इतिहास में है कि लोग उस लीडर के पीछे चलते हैं जिस पर उनका भरोसा बन सके कि यह व्यक्ति पंजाब के हक में फैसले लेने के समर्थ हो तथा पंजाब के साथ धोखा नही करेगा। कभी भी किसी हाई कमांड की ओर से थोपे व्यक्ति के साथ लोग कभी भी नही चलते। यह उनका वहम होता है जिस को लोग समय-समय पर दूर कर देते हैं। कांग्रेस हाई कमांड के पास लीडरों की कोई भी कमी नही, बहुत सारे लीडर है जो अपने भाईचारे में भी मज़बूत आधार रखते हैं तथा पंजाब के लोगों के भी विश्वासपात्र हैं। कांग्रेस हाई कमांड ने अगर पंजाब के वर्करों के अन्दर जोश भरने के लिये कोई नई पहल कदमी की होती तो विरोधी पार्टियों के पसीने छूट जाने थे तथा हर पार्टी को अपनी अपने चुनाव रणनीति का फिर से मुल्यांकन करना पड़ सकता था। बाकी चुनाव के युद्ध में कौन सी पार्टी विजयी होकर निकलती है यह आने वाला समय ही बताएगा। 

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