Edited By Urmila,Updated: 28 Oct, 2025 12:30 PM

विदेश में बेहतर रोजगार की तलाश में गए पंजाब और हरियाणा के युवाओं को हाल ही में अमेरिका और ताजिकिस्तान में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
पंजाब डेस्क : विदेश में बेहतर रोजगार की तलाश में गए पंजाब और हरियाणा के युवाओं को हाल ही में अमेरिका और ताजिकिस्तान में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अमेरिका में डंकी रूट से शरणार्थी बनकर गए भारतीय युवाओं को घर-घर तलाशी और हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें डिटेंशन सेंटरों में भेजा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में बने इन सेंटरों में अब तक 50 से 55 हजार भारतीयों को रखा जा चुका है और यह सिलसिला लगातार जारी है।
अमेरिका में ट्रकिंग और फ्रिज़न इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर युवाओं को पकड़ा जा रहा है। पिछले तीन महीनों से ट्रकिंग का कारोबार ठप पड़ा हुआ है। कई नए खरीदे गए ट्रक अब बेचने पड़ रहे हैं। काम छोड़कर रिश्तेदारों के पास गए युवा भी हिरासत में लिए जा रहे हैं।
वहीं, ताजिकिस्तान में धोखाधड़ी के शिकार रोपड़ जिले के सात युवा हाल ही में भारत लौटे। इन युवाओं को ड्राइविंग का काम करने के नाम पर विदेश भेजा गया था, लेकिन वहां उन्हें मजदूरी के लिए मजबूर किया गया। उन्हें खराब खाना, ठंड और डर का सामना करना पड़ा और परिवारों से संपर्क टूट गया। रोपड़ के बैसों गांव के हरविंदर सिंह ने बताया कि "40 दिन तक फंसे रहे, अब घर लौटकर ऐसा लग रहा है जैसे दूसरी जिंदगी मिली हो।"
इन घटनाओं के बाद लालपुरा के नेताओं ने पंजाब सरकार से राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। लालपुरा के प्रतिनिधि ने कहा कि नौजवानों को असुरक्षित देशों की ओर भेजना उन्हें जोखिम में डाल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की मदद का आभार जताया और पंजाब सरकार से कहा कि युवाओं के लिए सुरक्षित और स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
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