पंजाब के हालात खौफनाक! लोगों का रहना मुश्किल, इस इलाके में दिखने लगी...

Edited By Vatika,Updated: 12 Sep, 2025 02:03 PM

punjab flood panic situation

जिला कपूरथला में आई बाढ़ का पानी अब तेजी से अपने नदी वाले रास्ते की ओर

सुल्तानपुर लोधी : जिला कपूरथला में आई बाढ़ का पानी अब तेजी से अपने नदी वाले रास्ते की ओर लौट रहा है। डूबे हुए घरों और खेतों से जैसे-जैसे पानी निकल रहा है, अपने पीछे तबाही के कई निशान छोड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कई इंसानी लाशें और मरे हुए पशु बहकर आ रहे हैं। गंदले पानी से लगातार बदबू फैल रही है, जिससे लोगों का वहां रहना मुश्किल हो रहा है। इस बदबू भरे माहौल में कई बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। हरिके से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

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"पंजाब केसरी की टीम पिछले एक महीने से लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में जमीनी स्तर पर कवरेज कर रही है और लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठा रही है। यहां तक कि बाढ़ आने से पहले पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश को देखते हुए सरकार और प्रशासन को पहले ही अलर्ट किया गया था कि बांधों की मुरम्मत और अन्य ज़रूरी इंतजाम किए जाएं। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान मंड क्षेत्र में देखा गया कि कई जगहों पर गांवों को जाने वाली सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। खेत पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। कई लोगों के घरों को भी भारी नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई होना मुश्किल लग रहा है। कई दानदाता और संस्थाएं इन लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन नुकसान इतना ज्यादा है कि दोबारा बसने में अभी लंबा समय लगेगा।

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प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी जा रही है कि जैसे-जैसे पानी घट रहा है, फैलने वाली बीमारियों से निपटने के लिए तुरंत इंतज़ाम किए जाएं। अमृतसर और अन्य जिलों में बदबू के कारण भयंकर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग खामोश बैठा है। जब सिविल सर्जन डॉ. राजीव प्राशर और डिप्टी कमिश्नर अमित पंचाल से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो दोनों ने फोन रिसीव करना जरूरी नहीं समझा। बड़ा सवाल यह है कि अगर बाढ़ प्रभावित इलाकों में कोई बीमारी फैलती है तो लोग किससे संपर्क करें? स्वास्थ्य विभाग के जूनियर अधिकारी और कर्मचारी पहले दिन से मदद कर रहे हैं, लेकिन सीनियर अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं।

किसानों की नाराज़गी – 20 हज़ार का मुआवज़ा काफी नहीं
किसान अमर सिंह मंड और डॉ. नरिंदर सिंह ने बताया कि उनकी धान की फसलें पूरी तरह सड़ चुकी हैं। इन्हें अब अपनी ज़मीन को दोबारा जोतना पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले 20 हज़ार रुपए प्रति एकड़ मुआवज़े से यह नुकसान पूरा नहीं हो सकता। घरों को भी काफी नुकसान हुआ है – कई घरों की छतें गिर गईं, दीवारों में दरारें पड़ गईं और कुछ घर तो पानी में बह गए।

 

पशुओं के लिए हरे चारे की भारी किल्लत
किसान नेता जतिंदर सिंह महीवाल ने बताया कि खेतों में रेत और मिट्टी के टीले बन गए हैं, जिसकी वजह से अगले 4-5 महीने तक कोई फसल होने की संभावना नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत पशुओं के लिए हरे चारे का इंतज़ाम करना बन गई है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। इस मौके पर जतिंदर सिंह, कुलविंदर सिंह, गुरप्रताप सिंह, नरिंदर सिंह, हरदीप सिंह आदि मौजूद थे।

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