पावरकॉम के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनाया राहत भरा फैसला

Edited By Kalash,Updated: 04 Aug, 2026 11:47 AM

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स को बकाया महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जारी करने के सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी।

चंडीगढ़ (गंभीर): पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स को बकाया महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जारी करने के सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी। एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने बकाया रकम का भुगतान होने तक राज्य को किसी भी तरह की बड़े स्तर पर एडवर्टाइजमेंट कैंपेन चलाने से भी रोक दिया। बेंच ने फैसला सुनाया कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उनके जमा हुए सर्विस बेनिफिट्स से वंचित करने के लिए पैसे की कमी को आधार नहीं बनाया जा सकता। बेंच ने कहा कि जब तक ऐसे सभी बकाया भुगतान नहीं हो जाते, पंजाब राज्य को प्रिंट या सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर एडवर्टाइजमेंट कैंपेन जैसे कोई भी गैर-जरूरी खर्च नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये खर्च राज्य कर्मचारियों को बकाया देने से मना करने को सही नहीं ठहरा सकते।

पंजाब सरकार की तरफ से पंजाब के अटॉर्नी जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी थी कि पेंडिंग महंगाई भत्ता (DA) जारी करने का सिंगल जज का निर्देश न्याय के खिलाफ था। सिंगल जज ने राज्य की 18 फरवरी, 2025 की ‘लिक्विडेशन स्कीम’ को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत उम्र के आधार पर किश्तों में पेंशन का बकाया देना था। इसे मनमानी और संविधान की धारा 14 का उल्लंघन करने वाला करार गियाी गया था। एडवोकेट जनरल (AG) मनिंदरजीत सिंह बेदी ने कहा कि जिस समय ऑर्डर पास किया गया था, उस समय सिंगल बेंच को अलॉट रोस्टर कानूनी संस्थाओं और कॉर्पोरेशनों के लिए था, न कि पूरे राज्य के सर्विस रोस्टर के लिए। इसलिए उन्होंने दलील दी कि ऑर्डर बिना अधिकार क्षेत्र के पास किया गया था।

ए.जी. बेदी ने आगे कहा कि यह स्थापित कानून है कि बिना अधिकार क्षेत्र के पास किया गया कोई भी आदेश शुरू से ही मानने योग्य नहीं होता। बेदी ने यह भी कहा कि L.P.A. का दायरा सिर्फ उसी दलील तक सीमित है जिस पर सिंगल बेंच के सामने बहस हुई थी और मीरा देवी मंत्री बनाम बिहार राज्य, L.P.A. नंबर 157/2025 में पटना हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। रेस्पोंडेंट कर्मचारियों की ओर से पेश सीनियर वकील ने इन तर्कों का विरोध किया और कहा कि 'अदालत के बाहर की कार्रवाई' की दलील बेबुनियाद बै क्योंकि रोस्टर आपस में ओवरलैप हो रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि P.S.P.C.L. ने साफ तौर पर माना है कि वे राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करते हैं, इसलिए राज्य सरकार के खिलाफ निर्देश जारी करना गलत नहीं है।

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