करतारपुर कॉरीडोरः करोड़ों खर्चने के बाद टैंट सिटी भी नहीं आई काम, सर्द रातों में भटकते हैं श्रद्धालु

Edited By swetha,Updated: 16 Dec, 2019 11:04 AM

kartarpur corridor

कलकत्ता के श्रद्धालु को रात्रि में ठहरने को जब टैंट नहीं मिला तो उसने एक रैस्टोरैंट के निर्माणाधीन कमरे में रात गुजारी।

डेरा बाबा नानक(वतन): भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर निर्मित करतारपुर साहिब कॉरीडोर से पूर्व अनुमान अनुसार प्रतिदिन 5 हजार के हिसाब से श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनार्थ नहीं जा रहे, परंतु फिर भी शनिवार व रविवार को संगत एक हजार का आंकड़ा पार कर जाती है। रविवार को 37वें दिन 1967 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इन 2 दिनों में कस्बे में सुबह से ही संगत की आमद शुरू हो जाती है, लेकिन अधिकांश संगत प्रात:काल कस्बे में पहुंच कर सायं को वापिस चली जाती है। डेरा बाबा नानक में रात्रि न ठहरने का मुख्य कारण यह भी है कि वहां लोगों को रात में ठहरने की कोई जगह नहीं मिलती।

बटाला, गुरदासपुर व अमृतसर के होटलों में रहना पड़ता है श्रद्धालुओँ को

दूरवर्ती क्षेत्रों से आने वाली संगत गूगल पर कस्बे में ठहरने हेतु सर्च करती है तो उन्हें बटाला, गुरदासपुर व अमृतसर के होटल ही मिलते हैं जिस कारण संगत या तो इन शहरों में रात्रि ठहर कर प्रात:काल कस्बे में पहुंचती है या फिर अनुमान लगा कर आती है कि वह अपना सफर तय कर प्रात:काल ही कस्बे में पहुंचे। गत दिवस भी कलकत्ता से पहुंचे हिन्दू श्रद्धालु को रात्रि में ठहरने हेतु जब कुछ न मिला तो उसने कस्बे के रैस्टोरैंट में अस्थाई तौर पर निर्मित एक कमरे को किराए पर लेकर रात गुजारी क्योंकि गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब के प्रबंधकों ने उसे कमरा देने से इसलिए असमर्थता व्यक्त कर दी थी कि संगत अधिक आने कारण उनके पास कोई कमरा नहीं है। 

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टैंट सिटी पर खर्च किए गए करोड़ों भी बेकार

पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर साहिब के रास्ते हेतु बनाई गई 40 एकड़ की टैंट सिटी एक भी दिन श्रद्धालुओं के काम नहीं आई और करोड़ों रुपए व्यय करके भी संगत एक दिन भी यहां नहीं ठहरी। संगत का कहना है कि यदि टैंट सिटी में जगह होती तो संगत रात को कस्बे में ठहर सकती थी।

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श्री करतारपुर साहिब मार्ग पर संगत के लिए नहीं कोई शौचालय

नैशनल हाईवे अथारिटी द्वारा गांव मान के टी-प्वाइंट से करतारपुर साहिब कॉरीडोर तक बनाई गई लगभग 4 कि.मी. लम्बी सड़क पर संगत की सुविधा हेतु न तो शौचालय और न ही पीने वाले पानी का प्रबंध किया गया है।

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संगत को दूरबीन की सुविधा से रखा गया वंचित 

भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर निर्मित धुस्सी बांध पर पहले बने करतारपुर दर्शन स्थल पर पक्की दूरबीन की सुविधा थी, लेकिन कॉरीडोर बनने से दर्शन स्थल को तोड़ कर वहां अस्थाई दर्शन स्थल का निर्माण किया गया है, परंतु अब जबकि संगत की आमद बढ़ी है तो प्रबंधकों द्वारा दूरबीन की सुविधा प्रदान नहीं की गई और संगत दूर से ही दर्शन कर वापिस चली जाती है।

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साइन बोर्ड न होने से संगत परेशान 

प्रशासन द्वारा कस्बे में कॉरीडोर संबंधी किसी तरह का साइन बोर्ड न लगाने से प्रात:काल से ही संगत कस्बे में पहुंच कर कॉरीडोर का रास्ता पूछती दिखाई देती है। लोगों ने जिला  प्रशासन से मांग की है कि संगत की सुविधा हेतु कस्बे में साइन बोर्ड लगाए जाएं।

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