Edited By Kalash,Updated: 14 Oct, 2026 10:12 AM

जालंधर में ई-बस सेवा प्रोजेक्ट का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। शहरवासी लंबे समय से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं
जालंधर (खुराना): जालंधर में ई-बस सेवा प्रोजेक्ट का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। शहरवासी लंबे समय से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक बसों को चलाने के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार नहीं हो पाई हैं। इस बीच नगर निगम कमिश्नर सुरिंदर सिंह ने आज लम्मा पिंड चौक और नगर निगम के सैंट्रल टाऊन डिपो में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
कमिश्नर ने दोनों जगहों पर बस डिपुओं के निर्माण, बिजली के काम और बसों के संचालन के लिए जरूरी सुविधाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिए कि काम में आ रही रुकावटों को तुरंत दूर किया जाए और सभी काम तय समय में पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्माण कार्यों की क्वालिटी भी ध्यान रखने को कहा।
97 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की है योजना
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जालंधर में कुल 97 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इनमें 12 मीटर लंबी 16 बड़ी बसें और 9 मीटर लंबी 81 मिनी बसें शामिल हैं। इन बसों की पार्किंग और संचालन के लिए शहर में दो डिपो बनाए जा रहे हैं। लम्मा पिंड चौक स्थित डिपो में 55 बसें खड़ी हो सकेंगी, जबकि लाल बहादुर शास्त्री चौक के पास नगर निगम के सैंट्रल टाऊन डिपो में 42 बसों की व्यवस्था होगी।
दोनों डिपुओं में निर्माण और बिजली से जुड़े कामों पर करीब 12.98 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 7.08 करोड़ रुपए निर्माण कार्यों और 5.90 करोड़ रुपए बिजली से जुड़े कामों पर खर्च किए जाएंगे। प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, लम्मा पिंड डिपो में अभी तक केवल 13 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ है, जबकि सैंट्रल टाऊन डिपो में करीब 49 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। इन आंकड़ों से साफ है कि दोनों डिपुओं में अभी काफी काम बाकी है।
146 किलोमीटर लंबे होंगे बस रूट
शहर में ई-बस सेवा शुरू होने पर मुख्य इलाकों को जोड़ने के लिए करीब 146 किलोमीटर लंबे रूट बनाने की योजना है। इनमें आऊटर रिंग रोड, इनर रिंग रोड, बस स्टैंड से एल.पी.यू., किशनगढ़ से लांबड़ा, बिधीपुर से जंडू सिंघा, करतारपुर से सीटी इंस्टीच्यूट, वरियाणा से हवेली और सेंट सोल्जर कॉलेज से जमशेर तक के रूट शामिल हैं।
कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण और बिजली से जुड़े कामों में तालमेल बनाकर काम किया जाए तथा प्रोजैक्ट की नियमित निगरानी की जाए, ताकि इसे तय समय में पूरा किया जा सके। अब देखने वाली बात यह होगी कि अधिकारियों के इन निर्देशों के बाद ई-बस सेवा प्रोजैक्ट के काम में कितनी तेजी आती है और शहरवासियों को आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा कब तक मिल पाती है।
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