Punjab में अब Online होगी अज्ञात शवों की शिनाख्त, जानिए कैसे करेगा 'पहचान' पोर्टल काम

Edited By Vatika,Updated: 05 Sep, 2026 09:05 AM

identification of unidentified bodies in punjab to go online

पंजाब भर के सरकारी अस्पतालों व मोर्चरी में पहुंचने वाले लावारिस (अज्ञात) शवों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार

लुधियाना (राज): पंजाब भर के सरकारी अस्पतालों व मोर्चरी में पहुंचने वाले लावारिस (अज्ञात) शवों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और मानवीय बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सेहत मंत्री डॉ. बलवीर सिंह ने 2 सितंबर को विशेष 'पहचान' पोर्टल लॉन्च किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब राज्य भर के अज्ञात शवों का डेटा, फोटो और पहचान चिह्न ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अपनों की तलाश में भटक रहे परिजनों को मोर्चरी के चक्कर काटने और मानसिक प्रताड़ना से निजात मिलेगी। पोर्टल लॉन्च होने के महज तीन दिनों के भीतर इस पर 270 अज्ञात शवों की तस्वीरें अपलोड की जा चुकी हैं, जबकि पिछले 24 घंटों में करीब 350 लोगों ने ओटीपी के जरिए लॉगिन कर पोर्टल को देखा है।

सालाना 7 हजार शव, सिर्फ 5% की ही हो पाती थी पहचान
आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में हर साल लगभग 6,000 से 7,000 अज्ञात शव बरामद होते हैं। पुलिस नियमों के तहत ऐसे शवों को 72 घंटे (3 दिन) मोर्चरी में सुरक्षित रख अखबारों में इश्तिहार दिया जाता था। इस पारंपरिक व्यवस्था के जरिए केवल 5 प्रतिशत शवों की ही पहचान हो पाती थी, जबकि 95 फीसदी मामलों में शव लावारिस ही रह जाते थे। 6-7 साल के गहन मंथन के बाद स्वास्थ्य विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. चरण कमल की देखरेख में 'पहचान' पोर्टल तैयार किया गया है, जो मृतक और परिजनों के बीच एक डिजिटल सेतु का काम करेगा।

मोबाइल नंबर और OTP से सीधा लॉगिन, प्राइवेसी का पूरा ध्यान
इस पोर्टल का उपयोग बेहद आसान और सुरक्षित रखा गया है। कोई भी नागरिक अपने मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी (OTP) के जरिए लॉगिन कर सकता है। पोर्टल पर शवों की गरिमा और सम्मान का विशेष ख्याल रखा गया है, पोर्टल पर तीन तरह की तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं—पहली केवल चेहरा, दूसरी पहचान चिह्न व फोटो, और तीसरी (यदि चेहरा क्षत-विक्षत हो) केवल पहचान चिह्न, कपड़े या संबंधित वस्तुएं। चेहरा खराब होने की स्थिति में शरीर पर बने टैटू, पुरानी सर्जरी के निशान, कद, कपड़े, जूते का ब्रांड, कलावा, अंगूठी या शरीर पर गुदे पारिवारिक नाम अपलोड किए जाएंगे ताकि बिना गली-सड़ी लाश देखे शिनाख्त हो सके।

क्लेम करने पर पुलिस और डॉक्टर को जाएगा तुरंत अलर्ट
यदि पोर्टल पर फोटो या विवरण देखकर कोई व्यक्ति शव को अपना संबंधी या परिजन मानता है, तो उसे पोर्टल पर ही एक ऑनलाइन 'क्लेम फॉर्म' भरना होगा। फॉर्म में अपनी जानकारी और मृतक से संबंध दर्ज करते ही संबंधित मोर्चरी के डॉक्टर और संबंधित थाना पुलिस को तुरंत अलर्ट मैसेज चला जाएगा। इसके बाद पुलिस आवश्यक कागजी व कानूनी सत्यापन कर शव ससम्मान परिजनों को सौंप देगी।

सिविल अस्पतालों में इलेक्ट्रॉनिक दाह गृह की योजना
स्वास्थ्य विभाग भविष्य की योजनाओं के तहत हर सरकारी सिविल अस्पताल में इलेक्ट्रॉनिक श्मशान गृह (क्रेमेटोरियम) स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। मौजूदा व्यवस्था में लकड़ी पर दाह संस्कार करने में प्रति शव ₹5,000 से ₹10,000 का खर्च आता है। इसके अलावा कई बार पुलिस कर्मियों द्वारा एक साथ 3-4 शवों को एक ही चिता पर जलाने की अमानवीय स्थिति भी सामने आती रही है। इलेक्ट्रॉनिक दाह गृह बनने से प्रदूषण और खर्च घटेगा, साथ ही मृतकों की राख और अस्थियां सुरक्षित रखकर भविष्य में परिजनों को सौंपी जा सकेंगी। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी स्वास्थ्य विभाग से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। उधर, पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (PCMSA) ने सरकार के इस कदम का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे मृतकों के सम्मान की दिशा में बेहद नेक और संवेदनशील पहल बताया है।

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