Edited By Kalash,Updated: 06 Jan, 2026 06:19 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार के फैसले ने पंजाब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
पंजाब डेस्क : हिमाचल प्रदेश सरकार के फैसले ने पंजाब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर नया लैंड रेवेन्यू सेस लगाने का फैसला लिया गया है। इसके बाद पंजाब को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार हिमाचल सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर 2 प्रतिशत लैंड रेवेन्यू सेस लागू किया है। इससे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के तहत आने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं पर कुल 433 करोड़ रुपये से ज्यादा का वार्षिक बोझ बढ़ जाएगा। इस अतिरिक्त खर्च को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को सांझा रूप से वहन करना होगा।
इस फैसले को लेकर BBMB ने हिमाचल सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। 3 जनवरी को हुई एक बैठक में हिमाचल के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सेस सभी हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर लागू किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2023 में हिमाचल सरकार ने जल उपकर लगाया था, जिसे केंद्र सरकार ने अवैध करार दिया था।
अब हिमाचल सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी कर लैंड रेवेन्यू सेस लागू किया है और इससे जुड़े राज्यों से आपत्तियां भी मांगी गई हैं। पंजाब सरकार ने 24 दिसंबर को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये परियोजनाएं व्यावसायिक नहीं बल्कि जनहित से जुड़ी हैं और भूमि अधिग्रहण के समय मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है।
पंजाब सरकार का यह भी कहना है कि यदि लैंड रेवेन्यू लगाया जाता है तो वह केवल जमीन के मूल्य पर होना चाहिए, न कि पूरी परियोजना की लागत पर। इस मुद्दे को लेकर आने वाले समय में राज्यों और केंद्र सरकार के बीच चर्चा और तेज होने की संभावना है।
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