नियम-कानून ताक पर, मीट बिक्री के नाम पर खुलेआम बिकती हैं बीमारियां

Edited By Urmila,Updated: 01 Jun, 2026 11:55 AM

diseases are openly sold in the name of meat sales

स्थानीय मीट विक्रेता नगर परिषद एवं संबंधित पशुपालन विभाग की कथित मिलीभगत से पिछले करीब 3 दशकों से मीट रूपी बीमारी को सरेआम बेच रहे हैं।

मुकेरियां (सागर): स्थानीय मीट विक्रेता नगर परिषद एवं संबंधित पशुपालन विभाग की कथित मिलीभगत से पिछले करीब 3 दशकों से मीट रूपी बीमारी को सरेआम बेच रहे हैं। नगर परिषद के अंतर्गत इस समय वैध एवं अवैध मीट विक्रेताओं की करीब 4 दर्जन से भी ऊपर दुकानें हैं तथा साथ ही रेहड़ियों पर भी पका हुआ मीट रात के समय बिक रहा है। सरकार के कानून के अनुसार प्रत्येक शहर में जानवर घर बकरखाना परिषद की सीमा से बाहर होना चाहिए, जहां समूह मीट विक्रेताओं को उक्त विभाग के अधिकारियों से वध किए जाने वाली भेड़, बकरियों, बकरा आदि की चिकित्सा करवानी होती है।

इसके अलावा साथ ही परिषद के सैनेटरी इंस्पैक्टर ने वध किए हुए प्रति जानवर का शुल्क वसूलना होता है, परंतु नगर परिषद के अंदर सभी कानूनों को ताक पर रखकर मीट विक्रेताओं द्वारा सरेआम मौत का व्यापार किया जा रहा है। परिषद का जानवर वध घर बकरखाना अभी तक मृत्युशैय्या पर है परंतु आश्चर्यचकित बात यह है कि मीट विक्रेताओं ने अपने कर्त्तव्य हेतु पिछले करीब 30 वर्षों से उक्त वध घर को बंद रखा है, जिस पर उक्त संबंधित विभाग एवं परिषद आज तक मुंह में उंगली दबाए बैठी है तथा मीट विक्रेता अपनी मनमर्जी से सरेआम कथित मर्जी का मीट बेचकर लोगों की जीवन लीला से खेल रहे हैं।

मीट विक्रेता जानवरों का वध (काटना) अपनी दुकानों पर ही करके निःसंकोच उक्त विभाग की चिकित्सा जांच के बिना ही बेच रहे हैं। मीट विक्रेताओं की दुकानों पर कटते हुए जानवर बिना किसी डॉक्टर की मोहर से आम ही देखे जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि परिषद के अंतर्गत मीट विक्रेताओं की दुकान पर दृष्टिपात किया जाए तो हर दुकान पर कम से कम 2 बकरे प्रतिदिन बिकते हैं जिसमें बीमार बकरा, भेड़ एवं सूअर आदि भी होते हैं। कई बार किसी विवाह समागम के लिए मुर्गों, मीट विक्रेता हर तरह का मीट मुहैया करवा देते हैं जबकि उसकी दुकान पर उतना मीट कटता ही नहीं।

इस संबंधित चर्चा है कि इन मीट की दुकानों तथा होटल आदि पर मीट की आड़ में बड़े जानवरों के मीट की भी बिक्री होती है। इसी तरह शहर में बीमार मीट से कोई संक्रामक बीमारी फैलने का डर बराबर बना हुआ है, परंतु इस समय कोई भी अधिकारी, परिषद या प्रशासन अपनी नींद से नहीं उठ रहा।

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