जबरन वसूली, डकैती और गैंगवार ने बढ़ाई पंजाब की चिंता, पुलिस की कमी से लोग असुरक्षित

Edited By Kalash,Updated: 03 Feb, 2026 04:56 PM

crime in punjab

आतंकवाद के पश्चात अपराधों को लेकर सबसे खतरनाक दौर में से गुजर रहे प्रदेश को समाज विरोधी तत्वों से निजात दिलाने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार जहां पूरी तरह से असफल साबित हुई है।

कपूरथला (भूषण/महाजन/मल्होत्रा): आतंकवाद के पश्चात अपराधों को लेकर सबसे खतरनाक दौर में से गुजर रहे प्रदेश को समाज विरोधी तत्वों से निजात दिलाने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार जहां पूरी तरह से असफल साबित हुई है। वहीं विगत चार वर्षों के दौरान सरकार की लापरवाही का आलम तो यह है कि लगातार रिटायर्ड से झूंज रही पंजाब पुलिस में एक बार भी नई भर्ती के लिए कोई मुहिम लांच नहीं की गई। जिसके कारण प्रदेश के लगभग सभी थाने पुलिस कर्मचारियों के जबरदस्त कमी से जूंझ रहे हैं।

गौरतलब है कि पंजाब वर्तमान दौर में फिरौती, लूट, फायरिंग तथा गैंगवार के साथ-साथ नशे की भयंकर समस्या से झूंज रहा है। मार्च-2022 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता संभाली थी तो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रदेश में 10 हजार नौजवानों को पंजाब पुलिस में भर्ती करने का ऐलान किया था तथा इस भर्ती मुहिम को लगातार चलाने की बात की थी। लेकिन अपनी हवा-हवाई बातों तथा घोषणाओं के लिए जानी जाती आम आदमी पार्टी की सरकार एक भी नए पुलिस कांस्टेबल की भर्ती नहीं कर सकी। जिसके कारण आज प्रदेश के सभी जिले पुलिस फोर्स की भयंकर कमी से झूंज रहे हैं।

आलम तो यह है कि जहां हर महीने 200 के करीब पुलिस कर्मचारी व अधिकारी नौकरियों से रिटायर्ड हो रहे हैं, वहीं अधिकतर पुलिस थानों में नशा माफिया व गैंगस्टरों से निपटने के लिए सैक्शनड पुलिस से भी कहीं कम पुलिस कर्मचारी काम कर रहे हैं। जिसके कारण ही नाईड डोमीनेशन मुहिम तथा ड्रग प्रभावित क्षेत्रों में चैकिंग मुहिम लगभग बंद होने से अपराधियों व ड्रग तस्करों के हौंसले बुलंदियों तक पहुंच गए हैं। कभी पुलिस थानों में लगने के लिए पुलिस इंस्पेक्टरों तथा सब इंस्पेक्टरों को जहां बड़ी-बड़ी सिफारिशें तलाशनी पड़ती थी।

वहीं अब पुलिस फोर्स की भारी कमी तथा काबिल पुलिस अधिकारियों के तबादले होने के कारण सीनियर पुलिस अधिकारियों को थानों में एस.एच.ओ. लगाने के लिए इंस्पैक्टर या सब इंस्पैक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी भी तलाशने मुश्किल हो गए हैं। जिसके कारण काफी संख्या में ऐसे थानों में कई एस.एच.ओ. की तैनाती की गई हैं, जिनके पास काम करने का तजुर्बा भी नहीं है। इसी कारण ऐसे अनुभव हीन पुलिस अधिकारियों को अपराधियों से निपटना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पुलिस फोर्स की इस जबरदस्त कमी ने प्रदेश की जनता को अपराधियों के रहमो-कर्म पर छोड़ दिया है। इसी कारण ही अपराधी भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में वारदातें कर आराम से फरार होने में कामयाब हो रहे हैं। ऐसा ही दृश्य पिछले दिनों मोहाली एस.एस.पी. दफ्तर के नजदीक देखने को मिला था। जहां दिन-दिहाड़े पेशी पर आए एक व्यक्ति को गोलियां मार कर कत्ल करने के पश्चात अपराधी बड़े आराम से फरार हो गए थे। यदि पुलिस की नाकाबंदी सख्त होती तो ऐसी वारदातों को डाला जा सकता था।

थानों में पुलिस कर्मियों की भारी कमी ने ऐसी खतरनाक वारदातों का ग्राफ नई ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है। एक पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि जल्द ही पंजाब पुलिस में 20-25 हजार कांस्टेबलों की भर्ती न की गई तो आने वालें दिनों में हालात ओर भी बदतर हो सकते हैं।

हालात तो इतने भयानक हो चुके हैं कि थानों में ज्यादातर पुरानें व तजुर्बेकार पुलिस अधिकारियों की लगातार हो रही रिटायर्डमैंट के कारण एफ.आर.आई. लिखने के लिए पुलिस कर्मचारी ही नहीं मिल रहे हैं। जिसके कारण एफ.आई.आर. की प्रक्रिया को पूरा करने में ही 2-3 दिन लग जाते हैं, जो कहीं न कहीं पंजाब पुलिस की फोर्स की भारी कमी के कारण पैदा हुए बदतर हालातों की ओर इशारा करते हैं।

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