लुधियाना के अस्पताल से शव गायब होने के मामले ने पकड़ा तूल, जुड़ सकती हैं अंगों की तस्करी के अंतर्गत भी धाराएं

Edited By Kalash,Updated: 20 Jan, 2026 03:16 PM

case of a body disappearing from a hospital in ludhiana

लुधियाना जिले के एक निजी अस्पताल से दिसम्बर में बुजुर्ग महिला का शव गायब होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अ

चंडीगढ़ (अर्चना): लुधियाना जिले के एक निजी अस्पताल से दिसम्बर में बुजुर्ग महिला का शव गायब होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अस्पताल के 4 निदेशकों के खिलाफ हालांकि पहले से एफ.आई.आर. दर्ज होने के बाद कानूनी कार्रवाई चल रही है परंतु अब पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर अंगों की तस्करी के अंतर्गत भी कार्रवाई शुरू हो सकती है।

सूत्रों की मानें तो अस्पताल प्रबंधन ने मृतक महिला के परिजनों को शव गायब होने से संबंधित सी.सी.टी.वी. फुटेज तक दिखाने से इंकार कर दिया था। परिजनों का मानना है कि फुटेज न दिखाने के पीछे अंगों की तस्करी ही वजह हो सकती है। शवगृह में रखे शव पर पहचान से संबंधित सारा रिकार्ड लिखा हुआ होता है। दूसरे परिजनों को जब शव सौंपा गया तो क्या उन्होंने अपने मृत परिजन का चेहरा भी नहीं देखा? जब दाह संस्कार किया तो क्या तब भी किसी को अपनी मृतक बुजुर्ग को देखने की चाह नहीं थी?

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दूसरे परिवार ने हमारी परिजन का दाह संस्कार कर दिया और जब हमने अपने परिजन के गायब होने की बात कही तो उन्होंने उस शव का भी दाह संस्कार कर दिया जो अस्पताल ने हमें थमा दिया था। परिजनों का कहना है कि अब वह उनकी परिजन का मृतक प्रमाण पत्र कैसे हासिल कर सकेंगे?

लुधियाना के निजी अस्पताल में महिला जसबीर कौर की मृत्यु हो गई थी। शव को अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। जब उनके पति जसबीर कौर का शव लेने के लिए अस्पताल गए तो प्रबंधन ने उन्हें कोई दूसरा शव दे दिया। तब परिजनों ने अस्पताल में धरना दिया और पता चला कि अस्पताल ने किसी दूसरे परिवार को बुजुर्ग महिला की शव दे दिया है और उस परिवार ने अंतिम संस्कार भी कर दिया। मृतक जसबीर कौर के परिवार ने पुलिस को शिकायत दी थी।

देश में पहली दफा घटित हुई ऐसी घटना : शंटी

पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी का कहना है कि इस मामले में नई धाराएं जोड़े जाने की जरूरत है क्योंकि मामले में हैरानी की बात यह है कि जिस परिवार ने 2 शवों का दाह संस्कार किया क्या उन्होंने पहला संस्कार करते हुए अपने परिजन का चेहरा देखने की जरूरत ही नहीं समझी? अंतिम संस्कार से पहले परिवार कई तरह की रस्में निभाता है तो चेहरा देखना तो लाजिमी है।

उस परिवार ने परिजन का चेहरा भी नहीं देखा और फिर दूसरे शव का भी फटाफट अंतिम संस्कार कर दिया। जिस परिवार ने अपने मृतक परिजन की अंतिम किरया ही नहीं निभाई वह उस परिजन का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे हासिल करेगा? यह मृतक महिला और परिजनों के मानवीय अधिकारों का भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत खुलेआम उल्लंघन है।

देशभर में यह ऐसा पहला मामला है, जिसमें एक शव गायब हो गया और दूसरे परिवार ने दो शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। कोरोना काल के समय में जरूर शवों की हेरफेर हुई लेकिन वह कुछ और मामला था। लोग कोरोना के डर से अपने मृतक परिजनों के शव तक को छूने से डरते थे। अब अस्पताल के अधिकारियों के बयानों के साथ-साथ पुलिस से मामले में रिपोर्ट मांगी गई है।

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