Edited By VANSH Sharma,Updated: 06 Aug, 2026 09:43 PM

भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पठानकोट से विधायक अश्वनी शर्मा ने बुधवार को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र भेजकर विधानसभा में उनकी टिप्पणियों को लेकर उत्पन्न विवाद पर निष्पक्ष, तथ्यों पर आधारित और न्यायसंगत...
जालंधर / चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पठानकोट से विधायक अश्वनी शर्मा ने बुधवार को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र भेजकर विधानसभा में उनकी टिप्पणियों को लेकर उत्पन्न विवाद पर निष्पक्ष, तथ्यों पर आधारित और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
अपने पत्र में शर्मा ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी द्वारा केंद्र सरकार के विरुद्ध लगाए गए निराधार आरोपों का जवाब देते समय उन्होंने केवल एक प्रचलित ग्रामीण पंजाबी कहावत का उदाहरण दिया था। उन्होंने कहा कि उक्त कहावत का प्रयोग करते समय उन्होंने पहले ही स्पष्ट रूप से "ਖਿਮਾ ਸਹਿਤ" (क्षमा सहित) शब्दों का उपयोग किया था, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट था कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समाज, समुदाय अथवा महिलाओं की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि अपने तर्क को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना था।
उन्होंने अध्यक्ष को यह भी स्मरण कराया कि सदन में उसी समय उन्होंने स्वयं स्पष्ट किया था कि यदि किसी सदस्य या समाज के किसी वर्ग को उनके शब्दों से ठेस पहुंची हो, तो उन शब्दों को विधानसभा की कार्यवाही से विलोपित (Expunge) किया जा सकता है। इससे उन्होंने सदन की गरिमा के प्रति अपने सम्मान और जनभावनाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया था।
शर्मा ने कहा कि इस स्पष्टिकरण के बावजूद आम आदमी पार्टी सरकार ने अनावश्यक रूप से इस मुद्दे का राजनीतिकरण करते हुए उनके विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि राजनीतिक विचारों को तथ्यों पर हावी न होने दें तथा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण निर्णय सुनिश्चित करें।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि यदि यह मुद्दा वास्तव में महिलाओं के सम्मान और गरिमा से जुड़ा है, तो विभिन्न अवसरों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा महिलाओं के संबंध में कथित रूप से दिए गए सार्वजनिक बयानों पर भी समान मानदंड लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में ऐसे कई उदाहरणों का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया कि किसी भी निर्णय से पहले उन टिप्पणियों की भी समान गंभीरता, निष्पक्षता और न्यायसंगत दृष्टिकोण से जांच की जाए।
पंजाब विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने की अपील करते हुए शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि संपूर्ण तथ्यों के आधार पर लिया गया निष्पक्ष, संतुलित और न्यायपूर्ण निर्णय जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास और मजबूत करेगा तथा यह संदेश देगा कि राजनीतिक दल की परवाह किए बिना प्रत्येक सदस्य के लिए समान मानदंड लागू होते हैं।
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