Edited By Subhash Kapoor,Updated: 09 Sep, 2026 12:30 AM

जिला कठुआ की तहसील बसोहली में मक्की की फसल इन दिनों खेतों में तैयार हो रही है, लेकिन जंगली जानवर किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। रैहण, मंडला, पलाही, पलासी और अन्य क्षेत्रों में जंगली जानवर खेतों में घुसकर फसल को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। इसको...
बसोहली, (सुशील सिंह): जिला कठुआ की तहसील बसोहली में मक्की की फसल इन दिनों खेतों में तैयार हो रही है, लेकिन जंगली जानवर किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। रैहण, मंडला, पलाही, पलासी और अन्य क्षेत्रों में जंगली जानवर खेतों में घुसकर फसल को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। इसको लेकर किसान काफी चिंता में हैं। अजय कुमार, लक्की सिंह, जतिंदर शर्मा, बलबीर सिंह, संजय कुमार, शंभू, कुलविंदर सिंह, मोहित सिंह, रोहित सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि मक्की की फसल तैयार होने पर है, लेकिन फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और दूसरी तरफ जंगली जानवरों से फसल को बचाना मुश्किल होता जा रहा है। किसानों ने बताया कि मक्की की फसल तैयार करने के लिए उन्होंने खेतों की जुताई, बीज, खाद, दवाई और मजदूरी पर काफी पैसा खर्च किया है। कई महीनों की मेहनत के बाद फसल तैयार होने की स्थिति में पहुंची है। ऐसे समय में जंगली जानवर खेतों में पहुंचकर फसल को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुक्सान होने का डर बना हुआ है।
किसानों के अनुसार रात के समय जंगली जानवरों के खेतों में आने की संभावना अधिक रहती है। यही कारण है कि किसान अपने खेतों में रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। कई किसान बारी-बारी से खेतों की रखवाली करते हैं, जबकि कुछ किसान खुद रात के समय खेत में बैठकर फसल की निगरानी करते हैं। उन्होंने खेतों में टेंट भी लगाए हुए है। किसानों का कहना है कि लगातार रातों को जागने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन फसल को बचाने के लिए उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
किसानों ने कहा कि खेती पहले ही मौसम और अन्य समस्याओं के कारण जोखिम भरा काम बन गई है। यदि तैयार फसल को जंगली जानवर नुक्सान पहुंचा देते हैं तो किसानों की पूरी मेहनत और खेती पर किया गया खर्च प्रभावित हो जाता है। किसानों का कहना है कि वे कड़ी मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन अब अपनी मक्की को बचाने के लिए उन्हें दिन-रात खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। इसका जल्द समाधान किया जाए।
बंदरों के आतंक से किसानों ने फसलें लगाना किया कम
क्षेत्र के कई इलाकों में बंदरों के बढ़ते आतंक से किसान परेशान हैं। बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। फसल बचाने के लिए किसानों को दिनभर खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है। लगातार नुक्सान के चलते कई जगहों पर ग्रामीणों ने फसलें लगाना कम कर दिया है। किसानों ने प्रशासन से समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है।
फसल सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था और मुआवजे की मांग
स्थानीय किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से इस समस्या का गंभीरता से समाधान करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेतों में जंगली जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही जिन किसानों की फसल को नुक्सान पहुंच रहा है, उनके नुक्सान का जायजा लेकर उचित सहायता भी दी जानी चाहिए। किसानों ने बताया कि अगर समय रहते जंगली जानवरों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में किसान खेती से दूरी बनाने को मजबूर हो सकते हैं। किसानों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले और फसल को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी समाधान निकाले।