बरनाला में जल संकट: अधिकारियों की मनमानी के कारण 25 घंटे ठप रही पानी की सप्लाई

Edited By Vatika,Updated: 17 Apr, 2026 01:59 PM

water crisis in barnala

एक ओर जहां अप्रैल महीने की कड़कती गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय सीवरेज बोर्ड की कथित

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): एक ओर जहां अप्रैल महीने की कड़कती गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय सीवरेज बोर्ड की कथित लापरवाही के कारण शहर के बड़े हिस्से को पीने वाले पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ा। सीवरेज बोर्ड द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के पीने वाले पानी के ट्यूबवेल लगातार 25 घंटे बंद रखे गए, जिस कारण हजारों लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

आधा शहर रहा पानी से वंचित
इस संबंध में जानकारी देते हुए नगर पार्षद (कौंसिलर) नरेंद्र गर्ग नीटा और नगर कौंसिल के पूर्व प्रधान मक्खन शर्मा ने बताया कि पिछले 25 घंटों से ट्यूबवेल बंद रहने के कारण अनाज मंडी रोड, कच्चा कॉलेज रोड, पटेल नगर, 16 एकड़, वार्ड नंबर 8 और वार्ड नंबर 9 का पूरा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन क्षेत्रों के घरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप रही, जिससे लोगों का दैनिक कामकाज भी रुक गया।

अधिकारियों की लापरवाही आई सामने
कौंसिलर नरेंद्र गर्ग नीटा ने बताया कि उनके वार्ड के निवासियों ने शिकायत की कि कल से घरों में पानी की एक बूंद भी नहीं आई। जब उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, तो पता चला कि ये ट्यूबवेल 15 अप्रैल को सुबह 9 बजे से ही बंद करवाए गए थे। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इतनी भयानक गर्मी में पानी की सप्लाई बंद करना लोगों के साथ सरासर नाइंसाफी है।

धरने की चेतावनी के बाद बहाल हुई सप्लाई
नरेंद्र नीटा ने बताया कि जब उन्होंने एसडीओ (SDO) सीवरेज बोर्ड को सख्त लहजे में वार्ड निवासियों के साथ दफ्तर के बाहर धरने पर बैठने की चेतावनी दी, तब विभाग हरकत में आया। इस चेतावनी के बाद आज ट्यूबवेल चालू किए गए और पानी की सप्लाई दोबारा शुरू हो सकी।

विभागीय कार्रवाई की मांग
नगर पार्षद नीटा गर्ग और मक्खन शर्मा ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि किस अधिकारी के आदेश पर 25 घंटे पानी की सप्लाई बंद रखी गई? उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार अधिकारी की पहचान कर उसके विरुद्ध उचित विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

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