Edited By Kalash,Updated: 07 Jan, 2026 12:23 PM

गर्मियों में आमतौर पर 20 रु. किलो तक बिकने वाले लहसुन ने सर्दियों के ज़ोर पकड़ते ही जहां कीमतों का दोहरा शतक जड़ दिया है वहीं टमाटर और अदरक
लुधियाना (खुराना): गर्मियों में आमतौर पर 20 रु. किलो तक बिकने वाले लहसुन ने सर्दियों के ज़ोर पकड़ते ही जहां कीमतों का दोहरा शतक जड़ दिया है वहीं टमाटर और अदरक की कीमतें भी 80 रु. किलो तक पहुंच जाने के कारण गृहणियों विशेष कर नौकरी पेशा परिवारों के रसोई घरों का बजट बिगड़ता हुआ दिखाई देने लगा है।
जालंधर बाईपास चौक के नजदीक पड़ते बहादर के रोड स्थित होलसेल सब्जी मंडी में जहां अधिकतर सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर गोभी मटर और गाजर की कीमतों को मानो जैसे ग्रहण लग गया हो। सबसे पहले बात करते हैं लहसुन, टमाटर, अदरक और प्याज की जिनके बिना रसोई घरों में बनने वाली सब्जियों और दाल में तड़का तक लगाना किसी भी परिवार के लिए मुश्किल बात है। वहीं करेला और भिंडी जैसी सब्जियां भी 50 से 70 रु. प्रति किलो तक पहुंचकर आम लोगों को महंगाई की आग में झोंकने का काम कर रही है।
सर्दियों के दिनों में लगभग प्रत्येक घर में लहसुन का इस्तेमाल कई गुना अधिक बढ़ जाता है तो वहीं दूसरी ओर पहाड़ी लहसुन घुटनों के दर्द के लिए दवाइयां बनाने तक में उपयोग किया जाता है जिसके चलते होलसेल बाजार में लहसुन की कीमतें 200 रु. प्रति किलो तक आंकड़ा छूने लगी है। ऐसे में आम परिवारों के लिए लहसुन का स्वाद चखना तो दूर एक पाव लहसुन खरीद पाना भी मुश्किल साबित हो रहा है।
तो वहीं दूसरी ओर होलसेल सब्जी मंडी में फुल गोभी मात्र 2 से 3 रु. किलो, गाजर 8 से 10 रु.किलो और मटर 15 से 18 रु. किलो तक बिक्री हो रहा है जिसके कारण गोभी, मटर और गाजर बेचने वाले व्यापारियों, आढ़तियों और किसानों को बड़ा आर्थिक संताप झेलना पड़ रहा है।
उक्त मामले को लेकर लुधियाना सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन विकास गोयल विक्की, सरपरस्त गुरविंदर सिंह मंगा,महासचिव गुरप्रीत सिंह उप प्रधान शैंकी चावला कैशियर डी.सी. चावला, उप चेयरमैन हरमिंदर सिंह बिट्टू, जसपाल सिंह काला, तरण पिंका कोचर ने कहा कि गोभी, मटर और गाजर की कीमतें औंधे मुंह नीचे आ गिरी हैं जिसके कारण संबंधित फसल की बिक्री का कारोबार करने वाले आढ़तियों, व्यापारियों, किसानों और जमींदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि खेतों में सब्जियों की कटाई के ऊपर प्रति किलो डेढ़ से 2 रु.और सब्जियों को मंडी तक पहुंचाने के लिए माल भाड़े पर भी 2 रु. किलो तक का खर्चा बैठता है ऐसे में गोभी 2 से 3 रु. बचने पर उल्टा जेब से पैसे भरने पड़ रहे हैं।
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