Edited By Kalash,Updated: 01 Jul, 2026 05:29 PM

स्थानीय शहर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के चलते, श्री मुक्तसर साहिब वासियों के घरों में पानी का गंभीर अकाल पड़ गया है।
श्री मुक्तसर साहिब (तनेजा, खुराना): स्थानीय शहर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के चलते, श्री मुक्तसर साहिब वासियों के घरों में पानी का गंभीर अकाल पड़ गया है। जल घर (वाटर वर्क्स) द्वारा पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद किए जाने के कारण शहर में हाहाकार मची हुई है। घरों के जल-स्रोत (डिग्गियां और टंकियां) पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण आम जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर शहर के प्रमुख नेताओं और पार्षदों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
एक सप्ताह से कोई सुनवाई नहीं
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान एडवोकेट बलदेव सिंह सिविया ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक सप्ताह से शहर की पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता पानी के लिए भटक रही है, लेकिन कोई भी सरकारी अधिकारी लोगों की फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। पूर्व पार्षद जिम्मी फत्तणवाला ने जमीनी हकीकत बयान करते हुए कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि वाटर वर्क्स की मुख्य डिग्गियां पानी से भरी हुई हैं, परंतु लोगों के घरों की डिग्गियां खाली पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में पानी की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। हालात इतने नाजुक बन चुके हैं कि इंसानों की बात तो दूर, बेजुबान पशुओं को पिलाने के लिए भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो रहा।
बहानेबाजी कर रहा है विभाग
समाजसेवी करमजीत करमा ने विभाग के ढीले रवैये का पर्दाफाश करते हुए बताया कि पिछले महीने विभाग ने यह कहकर पानी नहीं छोड़ा था कि पीछे से नहरी बंदी चल रही है। पर अब जब डिग्गियां पूरी तरह भर चुकी हैं, तो अधिकारी कर्मचारियों की हड़ताल का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तुरंत सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो वे लोगों को साथ लेकर तीखा और कड़ा संघर्ष छेड़ने के लिए मजबूर होंगे।
सबसे बड़ी मार: जमीन के नीचे का पानी पीने योग्य नहीं
श्री मुक्तसर साहिब की भौगोलिक स्थिति और सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां का भूमिगत पानी बहुत ज्यादा खारा, खराब और दूषित है। यह पानी पीने के बिल्कुल योग्य नहीं है और न ही इससे कपड़े धोने जैसे रोजमर्रा के घरेलू काम किए जा सकते हैं। लोग पूरी तरह वाटर वर्क्स की सरकारी सप्लाई पर ही निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी सप्लाई बंद होने के कारण लोगों की मुश्किलें हद से ज्यादा बढ़ गई हैं और वह बाजार से महंगे दाम पर पानी खरीदने के लिए मजबूर हैं।
एक्सियन कार्यालय का घेराव और दोनों पक्षों का पक्ष
समस्या से परेशान शहरवासियों के सब्र का बांध टूट गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यकारी इंजीनियर (एक्सियन) के कार्यालय पहुंचकर रोष प्रदर्शन किया और अपनी लिखित मांग दर्ज करवाई।
क्या कहना है हड़ताली कर्मचारियों का
जब हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि वह अपनी जायज मांगों को लेकर लंबे समय से विभाग और उच्च अधिकारियों से अपीलें कर रहे हैं। पर हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया है, जिसके कारण वे आज इस तीखे संघर्ष (हड़ताल) के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर हुए हैं।
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