Edited By Kalash,Updated: 26 Feb, 2026 12:25 PM

पाकिस्तान के सियालकोट शहर में गुरु नानक देव जी से जुड़ा एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जो भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद से बंद पड़ा का फिर से निर्माण किया जाएगा।
गुरदासपुर/सियालकोट (विनोद): पाकिस्तान के सियालकोट शहर में गुरु नानक देव जी से जुड़ा एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जो भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद से बंद पड़ा का फिर से निर्माण किया जाएगा। इस संबंधी पाकिस्तान सरकार ने तैयारी कर ली है। सीमापार सूत्रों के अनुसार यह जगह जिसे गुरुद्वारा पहली पातशाही नानकसर के नाम से जाना जाता है, सियालकोट के दसका जिले के फतेह भिंडर गांव में है। यह धार्मिक स्थान बंद रहने के कारण लगभग खराब हो चुका है।
ऐसा माना जाता है कि गुरु नानक देव जी इस जगह पर आए थे। बंटवारे के बाद, यह जगह पाकिस्तान की तरफ रही और सिख आबादी के चले जाने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। पंजाबी भाषा में लिखी एक मार्बल की पट्टिका, जिसमें गुरु नानक देव जी के आने की जानकारी है, अभी भी उस जगह पर मौजूद है।
पाकिस्तान के अल्प संख्यक समुदाय मामलों के मत्री रमेश सिंह अरोड़ा, कल्चर और हेरिटेज पर पार्लियामेंट्री कमेटी की चेयरपर्सन सईदा नोशिन इफतिखार और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के चेयरमैन कमर-उज़-ज़मान ने हेरिटेज एक्सपर्ट्स के साथ इस जगह का दौरा किया और इसकी हालत का पता लगाया।
पाकिस्तान पंजाब के मंत्री अरोड़ा ने कहा कि गुरु नानक देव जी सियालकोट में बाबा दी बेरी से लौटने के बाद इस जगह पर रुके थे। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा करीब 80 साल तक बंद रहा, जिसकी वजह से इसकी बहुत ज़्यादा अनदेखी हुई। बंद रहने के कारण इसकी दिवारों में दरारें देखी जा सकती हैं। उन्होंने इसे पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ के विजन के तहत सिख विरासत को बचाने और धार्मिक टूरिज़्म को बढ़ावा देने के प्रोग्राम का हिस्सा बताया।
अरोड़ा ने कहा कि अगले तीन सालों में पूरे पाकिस्तान में करीब 40-50 गुरुद्वारों की पहचान की गई है, जिन्हें रेनोवेशन के लिए चुना जाएगा। पहले फेज़ में 17-18 गुरुद्वारों पर काम चल रहा है और मई तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। अरोड़ा ने कहा कि पाकिस्तान आने वाले सिख तीर्थयात्रियों को यह जानकर भरोसा होता है कि उनके पवित्र स्थान सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के बिना सिख इतिहास अधूरा रहेगा।
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