जोरदार धमाके से दहला Sangrur, जांच में खुला 22 साल पुराना राज

Edited By Sunita sarangal,Updated: 09 Jul, 2026 06:30 PM

sangrur blast

घटना के संबंध में जानकारी देते हुए प्रत्यक्षदर्शियों ममता रानी, हरपाल सिंह सोनू और संदीप कुमार ने बताया कि इस पटाखा गोदाम के ठीक बगल में नगर कौंसिल संगरूर का कूड़ा डंप और वाहन पार्किंग स्थल है।

संगरूर(विवेक सिंधवानी): संगरूर शहर के बेहद घने और व्यस्त रिहायशी इलाके सब्जी मंडी के पास स्थित एक पटाखा गोदाम में बीती देर शाम हुए जोरदार धमाके और उसके बाद लगी भीषण आग ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। धमाका इतना जबरदस्त था कि गोदाम की छत पूरी तरह से ढह गई और देखते ही देखते ऊंची-ऊंची लपटों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत यह रही कि घटना के समय गोदाम के अंदर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिसके कारण एक बहुत बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

केंटर की टक्कर या साजिश? प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां की कहानी

घटना के संबंध में जानकारी देते हुए प्रत्यक्षदर्शियों ममता रानी, हरपाल सिंह सोनू और संदीप कुमार ने बताया कि इस पटाखा गोदाम के ठीक बगल में नगर कौंसिल संगरूर का कूड़ा डंप और वाहन पार्किंग स्थल है। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को नगर कौंसिल के कर्मचारी वहां से एक कैंटर (वाहन) को बाहर निकाल रहे थे। इसी दौरान लापरवाही के कारण कैंटर गोदाम के गेट से टकरा गया। इस टक्कर के कारण वहां से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन तारों में भयंकर स्पार्किंग हुई, जिसने तुरंत आग का रूप ले लिया और गोदाम के भीतर धमाके शुरू हो गए।

नगर कौंसिल पर लगे गंभीर आरोप, परिवार की सफाई

दूसरी ओर मौके पर मौजूद गोदाम संचालक के परिवार के सदस्यों ने सफाई देते हुए कहा कि गोदाम में वर्तमान में बड़ी मात्रा में पटाखे या विस्फोटक सामग्री नहीं रखी हुई थी। यहां केवल दीवाली के सीजन के दौरान ही पटाखों का निर्माण किया जाता है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने नगर कौंसिल के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन पिछले काफी समय से इस दुकान को खाली करवाने की कोशिश कर रहा था। उनका आरोप है कि दुकान खाली करवाने की इसी रंजिश के तहत जानबूझकर कैंटर से टक्कर मारी गई है।

डी.एस.पी. सिद्धू का बड़ा खुलासा: मृतक के नाम पर चल रहा था गोदाम

इस संवेदनशील मामले को लेकर गुरुवार सुबह जल्दबाजी में बुलाई गई एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डी.एस.पी. (आर) दलबीर सिंह सिद्धू ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस दुकान का पटाखा लाइसेंस सुनामी गेट, संगरूर निवासी विनोद कुमार पुत्र आत्मा राम के नाम पर जारी था। हैरान करने वाली बात यह है कि विनोद कुमार की लगभग 22 साल पहले ही मौत हो चुकी है। वर्तमान में इस अवैध कारोबार का संचालन उनका बेटा विकास कुमार कर रहा था।

बिना रिन्यूअल के घनी आबादी में बारूद का अवैध भंडारण

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह साफ तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है क्योंकि संबंधित लाइसेंस काफी समय पहले ही एक्सपायर (मियाद खत्म) हो चुका था। इसके बावजूद शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाके में बिना वैध परमिशन के पटाखों का निर्माण और अवैध भंडारण किया जा रहा था। पुलिस ने इस लापरवाही और अवैध संचालन को लेकर आरोपी विकास कुमार के खिलाफ इंडियन एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 9-बी और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 288 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने मलबे से नमूने (सैंपल्स) इकट्ठे कर लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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