Edited By VANSH Sharma,Updated: 24 Feb, 2026 09:47 PM

शिक्षा विभाग में पिछले 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे लिपिकीय कर्मचारियों में प्रति माह 31 हजार रुपये वेतन कटौती के फैसले को लेकर भारी रोष पाया जा रहा है।
गुरदासपुर (हरमन): शिक्षा विभाग में पिछले 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे लिपिकीय कर्मचारियों में प्रति माह 31 हजार रुपये वेतन कटौती के फैसले को लेकर भारी रोष पाया जा रहा है। कर्मचारियों ने विभाग का कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है।
यूनियन नेताओं के अनुसार, 17 फरवरी को मोहाली में हुए प्रदर्शन के दौरान विभागीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी तथा 01.04.2018 से नियमित करने संबंधी फाइल दो दिनों के भीतर वित्त विभाग को भेज दी जाएगी। लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद फाइल अभी भी शिक्षा विभाग में ही लंबित पड़ी है।
कर्मचारियों का कहना है कि यह मामला 10 अक्टूबर से लंबित है और पांच महीने बीत जाने के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि जिस विभाग को उन्होंने अपनी जिंदगी के बहुमूल्य वर्ष दिए, वही अब उनकी आजीविका पर प्रहार करने पर तुला हुआ है।
08/09/2025 की कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा वेतन में कटौती न करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री ने भी अधिकारियों को उचित निर्णय लेने के लिए कहा था, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
यूनियन नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से वेतन का 60 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है, इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा कटौती का निर्णय लेना अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने घोषणा की है कि 25 फरवरी को सामूहिक अवकाश लेकर वे मुख्यमंत्री के शहर में एकत्रित होंगे और संगरूर स्थित आवास की ओर रोष मार्च निकालेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वेतन कटौती के आदेश वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा तथा मंत्रियों के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किए जाएंगे। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत वेतन कटौती के आदेश रद्द कर 01.04.2018 से नियमित करने के आदेश जारी किए जाएं, अन्यथा आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here