Twitter war: ‘किसान आंदोलन’ पर भिड़े पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री

Edited By Vatika, Updated: 27 Nov, 2020 10:45 AM

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किसान आंदोलन व दिल्ली जाने से रोकने के मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर

चंडीगढ़ (बंसल, अश्वनी, धवन): किसान आंदोलन व दिल्ली जाने से रोकने के मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच वीरवार को जमकर ट्विटर वॉर चली। दोनों ने एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हुए एक-दूसरे को नसीहतें दीं। पहले पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर हरियाणा के मुख्यमंत्री को नसीहत दी लेकिन जवाब में खट्टर ने कैप्टन की उपलब्धता को लेकर ही सवाल उठा दिए। कै.अमरेंद्र ने संविधान दिवस का हवाला देते हुए खट्टर को नसीहतें दे डालीं। 

 

कै. अमरेंद्र बोले-किसानों को दिल्ली जाने से रोकना प्रजातंत्र का अपमान
पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह ने ट्वीट करके कहा कि बड़े दुख की बात है कि आज संविधान दिवस के दिन किसानों को अपनी आवाज उठाने से रोका जा रहा है। किसानों को अपनी बात कहने का अधिकार है। प्रजातंत्र में हर कोई अपनी आवाज उठा सकता है। अमरेंद्र ने खट्टर को कहा कि आप किसानों को दिल्ली जाने दें। उन्हें रोकना सही नहीं है। यह उनके हितों के साथ खिलवाड़ है। कै. अमरेंद्र ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि पंजाब में पिछले 2 महीने से किसान शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। हरियाणा सरकार उन पर बल का प्रयोग करके क्यों भड़का रही है। उन्होंने खट्टर से सवाल किया कि क्यों किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आगे जाने से रोका जा रहा है?



कै. अमरेंद्र ने तीसरे ट्वीट में खट्टर से कहा कि सरकार को निर्देश दें कि किसानों के खिलाफ ऐसे सख्त कदम क्यों उठा रही है? उन्होंने किसानों के समर्थन में कहा कि जो हाथ देश को अन्न देते है, उन्हें आदर दिया जाना चाहिए न कि उनके साथ धक्केशाही की जाए।  अगले ट्वीट में कै. अमरेंद्र ने कहा कि संविधान देश के विचारों का एक वसीयतनामा है जो कानून व संविधान दिवस को दर्शाता है। आज हम आत्मा से इसे बनाए रखने की प्रतिज्ञा लें और अपने नागरिकों के सही व स्वतंत्रता की गारंटी दें।  कै. अमरेंद्र ने कहा कि हिंसा की क्या जरूरत थी। पंजाब में किसान बिना किसी दिक्कत के पिछले 2 महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, यहां तक कि राज्य को इससे करोड़ों रुपए का घाटा भी सहना पड़ा। हरियाणा सरकार की कार्रवाईयों को भड़काऊ करार देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में हिंसा और अमन-कानून की कोई समस्या पैदा नहीं हुई। हरियाणा सरकार बल का प्रयोग करके किसानों को क्यों भड़का रही है? क्या सार्वजनिक मार्ग से शांतिमय तरीके से गुजरने का किसानों को कोई हक नहीं है? 

 

खट्टर ने कहा-अमरेंद्र किसानों को बहकाना छोड़ें, लोग आपका असली चेहरा देख चुके 
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के इस ट्वीट के कुछ समय बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए ट्वीट के माध्यम से ही पलटवार किया। मनोहर लाल ने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। उन्होंने अमरेंद्र सिंह को टैग करते हुए कहा कि मैं पिछले & दिनों से आपके साथ संपर्क का प्रयास कर रहा हूं। बड़े दुख की बात है कि आप बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इससे पता चलता है कि आप किसानों के प्रति कितने गंभीर हैं। आप केवल ट्वीट कर रहे हैं और बातचीत से भाग रहे हैं, क्यों? मनोहर लाल यही नहीं रुके उन्होंने अमरेंद्र से कहा कि अब झूठ व मनगढ़ंत बातों का समय पूरा हो चुका है। लोगों को आपका असली चेहरा दिख चुका है। 


कोरोना काल में लोगों के जीवन को खतरे में डालना ठीक नहीं है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि लोगों के जीवन से खेलना छोडि़ए। इस संकट के समय में हमें राजनीति करने से गुरेज करना चाहिए। मनोहर लाल ने ट्वीट के माध्यम से इस बात को दोहराया कि अगर किसानों को एम.एस.पी. नहीं मिलती है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। अमरेंद्र को नसीहत भरे अंदाज में मनोहर लाल ने कहा कि धरातल की वास्तविकता को समझिए और किसानों को बहकाना छोडि़ए। खट्टर ने कहा, कोरोना महामारी के दौरान लोगों की जिंदगी खतरे में डालने से रोकिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि लोगों की जिंदगी से मत खेलिये- कम से कम महामारी के दौरान सस्ती राजनीति से बचिए. इससे पहले दिन में अमरिंदर सिंह ने दिल्ली जाने से किसानों को रोकने के लिये हरियाणा सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि किसानों के खिलाफ बर्बर बल प्रयोग पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है।
 

 

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